बागेश्वर बाबा के हिम्मत को सलाम...
आज के समय में जब समाज तरह-तरह के झगड़ों, राजनीति और जातिगत खींचतान में उलझा हुआ है, ऐसे में अगर कोई युवा 150 किलोमीटर की पदयात्रा सिर्फ इसलिए करता है कि समाज एकजुट हो जाए — तो उसे सलाम बनता है। बागेश्वर धाम सरकार की यह “सनातन हिन्दू एकता पदयात्रा” सिर्फ दिल्ली से मथुरा तक की यात्रा नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने की यात्रा है... भारत आज जिस सबसे बड़ी बीमारी से जूझ रहा है, उसका नाम है जातिगत द्वेष... यह बीमारी धीरे-धीरे समाज की नसों में जहर की तरह फैल गई है। यह वह जहर है जो हमारे बीच नफरत, हीनभावना और अविश्वास पैदा करता है। आतंकवाद या नक्सलवाद से भी ज्यादा खतरनाक यह बीमारी है, क्योंकि यह हमारे घर, मोहल्ले और दिलों में बैठी है। दुख की बात यह है कि देश के बड़े-बड़े नेता, बुद्धिजीवी या कलाकार इस विषय पर बोलने से बचते हैं। मगर, अब एक 29 साल का लड़का आगे आया है, जो इस आग को बुझाने के लिए खुद मैदान में उतरा है... यह युवा न तो किसी राजनीतिक पार्टी का चेहरा है, न किसी पूंजीपति का मोहरा। यह वही भारत का बेटा है जो गाँव के स्कूल में पढ़ा, संघर्षों से गुजरा और अब देश को जोड़ने निक...