शिक्षक कौन ?


शिक्षक कौन?

शिक्षक—सिर्फ एक पेशे का नाम नहीं, बल्कि जीवन की अनवरत धारा है... वह वही है, जो सड़क की तरह खुद यथास्थान रहकर अनगिनत कदमों को मंज़िल तक पहुँचा देता है... उसका जीवन अपने लिए कम और दूसरों के लिए ज़्यादा होता है... जैसे मोमबत्ती खुद जलकर पिघलती है, पर आसपास के अंधेरों को रौशन कर देती है—वैसे ही शिक्षक अपने संघर्षों, तकलीफों और अभावों को परे रखकर विद्यार्थियों की आँखों में सपनों की रौशनी भर देता है...

शिक्षक की मुस्कान अक्सर उसके जीवन की गहरी पीड़ाओं को ढक लेती है... बाहर से वह शांत समंदर दिखता है, भीतर कितनी ही तूफानी लहरें छिपी होती हैं। फिर भी, “मनुष्य अपने दुःख से भाग सकता है, पर शिक्षक अपने कर्तव्य से नहीं” यही उसका कर्म है और कर्म ही धर्म...

वह केवल किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं रहता। कक्षा में बैठा वह जीवन का दार्शनिक भी है, जो विद्यार्थियों को सिखाता है कि “सपनों से बड़ी कोई दौलत नहीं और मेहनत से बढ़कर कोई पूजा नहीं।” कभी मित्र बनकर विद्यार्थियों की उलझनों को हल्का करता है, तो कभी बड़े भाई की तरह डाँटकर राह दिखाता है... जैसे पेड़ अपने फल खुद नहीं खाता, वैसे ही शिक्षक अपनी विद्या का स्वाद नहीं चखता, उसे सबके हिस्से में बाँट देता है...

शिक्षक का काम केवल गणित के सवाल हल कराना नहीं, बल्कि जीवन के उलझे समीकरण सुलझाना भी है... वह समझाता है कि सफलता केवल ऊँचे अंक पाने में नहीं, बल्कि सही सोच और सही दिशा में है... उसकी बातें विद्यार्थियों के मन में गूँजती रहती हैं—कभी सलाह की तरह, कभी चेतावनी की तरह। सच ही कहा गया है, “गुरु बिना ज्ञान अधूरा है, और ज्ञान बिना जीवन अंधेरा”

आज जब समाज में सब भाग-दौड़ में व्यस्त हैं, तब शिक्षक वही है जो रुककर कहता है—“धीरे चलो, मंज़िल भागी नहीं जा रही” वह विद्यार्थियों को यह विश्वास दिलाता है कि गिरना हार नहीं, बल्कि उठने का अभ्यास है...

शिक्षक कौन ? वह वह दीप है जो जलकर बुझ जाता है, पर पीढ़ियों को रोशनी दे जाता है। शिक्षक कभी नहीं मरते, वो हमेशा अपने विद्यार्थियों में जिंदा रहते हैं... वह वह सड़क है, जो खुद धूल-धक्कड़ सहती है, पर औरों को सुरक्षित रास्ता देती है... शिक्षक वही है—जो खुद को भुलाकर, दूसरों के जीवन को यादगार बना देता है...

प्रभाकर कुमार 'माचवे'

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

KBC की यह घटना बहुत कुछ कहती है...

नेपाल में हुए विद्रोह का पूरा सच

घूंघट में खान सर की दुल्हनियाँ...