जीवन के दो बड़े निर्णय



जीवन के ये दो बड़े निर्णय – आपकी जिंदगी को स्वर्ग भी बना सकते और नरक भी...

जीवन वही है जो हम चुनते हैं... रास्ते हमारे सामने होते हैं, पर उस पर चलने का निर्णय हमारा होता है... यही वजह है कि आज हम जैसे भी हैं, वो हमारे ही चुनावों का नतीजा है...
इन चुनावों में दो ऐसे निर्णय हैं जो इंसान की पूरी जीवनयात्रा की दिशा तय कर देते हैं—पहला निर्णय नौकरी और दूसरा निर्णय शादी... ये दोनों मिलकर तय करते हैं कि हमारी जिंदगी एक सुखद स्वर्ग बनेगी या क्लेशमय नरक...

नौकरी महज़ रोज़ी-रोटी का साधन नहीं, बल्कि हमारे आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और जीवन की दिशा की पहली सीढ़ी है...नौकरी चुनते समय हम अक्सर सिर्फ़ तनख़्वाह देखते हैं, लेकिन अनुभव सिखाता है कि माहौल और सीखने के अवसर कहीं ज़्यादा महत्त्वपूर्ण होते हैं... एक अच्छी नौकरी इंसान के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलती है, पर गलत नौकरी ऐसा बोझ बन जाती है कि हर सुबह अलार्म की आवाज़ भी एक सज़ा लगे...

गलत नौकरी का मतलब यह नहीं कि जीवन वहीं थम गया, लेकिन हाँ, यह जरूर है कि एक गलत शुरुआत इंसान को हताश और अविश्वासी बना सकता है..और यदि शुरुआत सही हो जाए तो वह आत्मविश्वास ज़िंदगी भर संबल देता है... 
इसलिए पहला निर्णय—नौकरी का—सिर्फ़ पैसे नहीं, बल्कि आपके पूरे व्यक्तित्व और भविष्य की बुनियाद तय करता है...  

आपको यह विचार करना चाहिए कि कहीं आप अगले दिन नौकरी करने के लिए ही तो नहीं आज नौकरी कर रहे हैं !

भारत में शादी जीवन का सबसे बड़ा सामाजिक निर्णय है...यहां विवाह बंधन में बंधना जितना आसान है, उससे बाहर निकलना उतना ही कठिन... यही कारण है कि शादी को लेकर ज़रा-सी जल्दबाज़ी जीवन को लम्बे समय तक उलझनों में डाल सकती है...

शादी दरअसल दो व्यक्तियों का साथ ही नहीं, बल्कि दो परिवारों की परंपराओं, संस्कृतियों और अपेक्षाओं का संगम है...
यदि यह रिश्ता समझ, धैर्य और पारस्परिक सम्मान पर आधारित हो तो जीवन सचमुच एक उत्सव बन जाता है.. लेकिन, यदि इसमें अहंकार, असंवाद और स्वार्थ आ जाएँ, तो वही रिश्ता हर दिन एक बोझ में बदल जाता है...
गलत नौकरी बदली जा सकती है, लेकिन गलत शादी से निकलना भारतीय समाज में आसान नहीं—कानूनी प्रक्रिया, सामाजिक ताने-बाने और परिवार का दबाव इंसान को भीतर से तोड़ भी सकता है...

दोनों निर्णय हमें अवसर भी देते हैं और जोखिम भी...
नौकरी का चुनाव करते समय सिर्फ़ पैकेज नहीं, सीखने और आगे बढ़ने की संभावना देखें... और शादी का निर्णय करते समय सिर्फ़ चेहरे की चमक या समाज का दबाव नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के साथ जीवनभर की साझेदारी का अहसास करें...

क्योंकि,अंततः यही दो फैसले तय करेंगे कि आपका जीवन एक हसीन गीत होगा या करुण क्रंदन...
स्वर्ग और नरक कहीं और नहीं, हमारे अपने ही निर्णयों से उत्पन्न हमारे जीवन में भीतर के अनुभव होते हैं..

प्रभाकर कुमार 'माचवे'

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