वो लड़की है...कोई सौदा नहीं !
आज मेरी मुलाकात लगभग 50 की उम्र के करीब व्यक्ति से हुई,मुझसे बात की शुरुआत उन्होंने अजनबी की तरह ही की, बात ही बात में वे मुझे भांप रहे थे, मेरे विचारों को अपने अनुभव के तराजू में तौल रहे थे... फिर एकाएक सामाजिक, राजनीतिक मुद्दों को छोड़ते हुए वे मुझसे निजी सवाल करने लगे, मसलन... क्या करते हो?, घर में कौन-कौन ?
फिर उन्होंने मुझसे मेरे पिताजी का नाम पूछा, शायद नाम सुनकर उन्हें विशेष संतुष्टि नहीं मिली... फिर उन्होने मेरे दादा जी का नाम पूछा, शायद उन्हें यहाँ भी संतुष्टि नहीं मिली... क्योंकि इन दोनों नाम के सरनेम में कुमार लगा था..
समाजशास्त्र का विद्यार्थी होने के नाते मैंने उनके नाम पूछने के मंशे को भांप लिया... असल में वो नाम नहीं, सरनेम जानना चाहते थे जिससे वो मेरी जाति का अनुमान लगा सके। उनकी संतुष्टि के लिए मैंने खुद ही अपनी जाति की जानकारी उन्हें दी, जाति नाम जानते ही उनकी आँखों में एक खुशी की झलक दिख पड़ी और फिर मेरे घर का पता पूछकर वो मेरे परिवार के साथ वर्षों पुराने संबंध को जोड़ने का प्रयास करने लगे।
बात ही बात में उन्होंने मुझसे पूछा, शादी कब करनी है? मैंने स्पष्ट कहा, अभी इस बिंदु पर विचार नहीं किया हूँ... फिर वो बड़े ही रसीली भाषा में मेरी तारीफ करने लगे, कहने लगे कि छोटी उम्र में बड़ी समझदारी की बात करते हो, किताबों के साथ-साथ व्यवहारकुशल भी हो... हल्की मुस्कुराहट के साथ उन्होंने मुझसे पूछा कोई नशा-वशा भी करते हो क्या? मैने स्पष्ट रूप से 'नहीं' कहा, यह सुनते ही वो और अधिक प्रसन्न हुए...फिर सही उम्र में ब्याह करने के फायदे पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने अपनी बेटी के बारे में मुझे बतलाना शुरू किया... कुछ कहने के बाद वो मेरे पिताजी का फोन नम्बर मुझसे मांगने लगे, मैंने स्पष्ट कहा कि मेरा अभी शादी करने का कोई इरादा नहीं है. इसलिए मेरे पिताजी से बात करने का कोई फायदा नहीं!
उन्होंने एक ऐसी बात बोली, जो मुझे भीतर तक झकझोर दिया, उन्होंने कहा- "सौदा है, पसंद आए तो ठीक है वरना देखने में क्या दिक्कत !"
मैं तुरंत पलटकर कहा,
"वो लड़की है, कोई सौदा नहीं !"
भले ही यह वाक्य प्रतिक्रिया में निकले हो, मगर यह विचारणीय है... आप भी विचार कीजिये...
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