हिंदी माध्यम के भी अच्छे दिन आएंगे !
हिंदी माध्यम के भी अच्छे दिन आएंगे !
जी हाँ दोस्तों... 15 वर्ष पहले तक देश के प्रशासनिक सेवा में हिंदी पट्टी के युवाओं का धाक हुआ करता था, बिहार और उत्तर प्रदेश के युवाओं का एक मात्र सपना जो उनकी ज़िंदगी बन जाता था वो होता था IAS बनना...
मगर, परीक्षा में हुई बदलाव ने उन्हें पूरी प्रतियोगिता से इस कदर बाहर किया जैसे भारतीय हॉकी टीम जो एक समय मिट्टी के मैदान पर विश्व विजेता हुआ करती थी और मैट पर फिसड्डी हो गयी...कुछ वैसा ही हाल UPSC की परीक्षा में हिंदी भाषी प्रतियोगियों का हुआ..
मगर, अब बदलते हालात को जिस तरह हॉकी में हम अपने पक्ष में करने में धीरे-धीरे ही सही सफल हो रहे...ठीक उसी प्रकार अब उम्मीद लगाई जा रही कि हिंदी माध्यम से भी UPSC की असाध्य वीणा को अब साधा जा सकता है.. हालात उतने संतोषजनक तो नहीं,मगर एक उम्मीद का दीया कई वर्ष पूर्व Nishant Jain निशान्त जैन के रूप में जला था...और अब रवि सिहाग के रूप में एक जुगनू टिमटिमाता हुआ दिख रहा है...
पिछले 12-15 वर्षों में शीर्ष 20 में सिर्फ इन 2 हिंदी भाषी प्रतियोगी का होना मेरे इस बात को प्रमाणित कर रहा है कि हिंदी माध्यम और UPSC आज भी एक बेमेल जोड़ ही है !
प्रश्न पत्र के फॉरमेट में कुछ बदलाव करके भले UPSC हिंदी पट्टी के युवाओं का प्रोत्साहन कर रही है,मगर यह पूरी तरह से क्षणिक उपलब्द्धि बनकर ही रह जायेगी ...मुझे ऐसे कोई आधारभूत सुधार दिख नहीं रहे जिससे UPSC में हिंदी माध्यम का फिर से वही धाक जम सके...
ख़ैर, रवि सिहाग जी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं !
अब उनके नाम का डंका पीटकर हिंदी माध्यम के कोचिंग संस्थान आने वाले वर्षों में हिंदी पट्टी के बच्चों को आईएएस बनाने का दिवा स्वप्न दिखाने में कामयाब जरूर होंगे...और हिंदी माध्यम का एक बच्चा अपने गांव के किसी डमी कॉलेज में नाम लिखाकर,अपने बाबू-माई से आशीर्वाद के रूप में ज़मीन गिरवी रखवाकर कोचिंग की लाखों फीस लेकर अपने कांधे पर अरमानों का झोला लादकर दिल्ली के मुखर्जी नगर की ओर पलायन करेगा...
इस सफ़र में उसे UPSC में IAS रैंक मिलेगी या नहीं ये तो नहीं कह सकता,मगर दिल्ली को एक बढ़िया उपभोक्ता जरूर मिल जाएगा,जो उसकी अर्थव्यवस्था को गति जरूर देगा...शिक्षा से जुड़े कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा,दिल्ली की गाड़ी अपने पटरी पर खूब तेजी से कुलाचे भरेगी !
गांव में बेटे के अफ़सर बनने का ख़्वाब पाली आंखें मोतियाबिंद से पथराती रहेगी और बच्चा दिल्ली की चकाचौंध में खो सा जाएगा...IAS बनने का सपना कब उसके दिलों से,दिमाग से फुर्र हो जाएगा,इसका इल्म उस बच्चें को भी नहीं होगा...और उसका दिल दिल्ली से दिल्लगी कर बैठेगा..
UPSC की उम्र सीमा या क्षमता की हवा निकलने के बाद उसे स्टेट PCS का भी एक नया सपना दिखाया जाएगा,और फिर उसके नाम पर इसी कारोबार को नए सिरे से चलाने की योजना बनेगी !
रवि सिहाग जी की आदमकद की तस्वीरें बत्रा के बगल में लगाई जाएंगी,अलग-अलग कोचिंग वाले उनकी सफलता का सेहरा अपने सिर पर बांधेंगे...और पूरे जश्न के साथ नए बकरों को हलाल करने की योजना बनेंगी !
बड़े-बड़े रणनीतिकार हिंदी माध्यम से UPSC के असाध्य वीणा को साधने का रहस्य बतलायेंगे...ऑप्शनल विषय के चयन पर भी गम्भीर चर्चा होगी...और यह भरोसा दिलाया जाएगा कि जब रवि सेवारत रहते हुए सफल हो सकता तो आप क्यों नहीं !
इस कल्पनालोक को हकीकत में बदलने के लिए कुछ सरफिरे अपनी नौकरी को छोड़कर पूरी तैयारी से इस दंगल में कूद पड़ेंगे...कई लोगों को ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से घर से अफ़सर बनने का सपना भी दिखाया जाएगा...यह सब कारोबार होगा रवि सिहाग जी की सफलता के नाम पर...
ये इक्का दुक्का सफलताएं सपनों को जिंदा रखेगी,और जब तक सपनें होंगे, कारोबार चलता रहेगा !
#UPSC #hindimedium
प्रभाकर कुमार 'माचवे' की कलम से ....
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