मायके का अनावश्यक हस्तक्षेप दाम्पत्य जीवन की असफलता का मूल कारण

लड़की पक्ष वाले लड़की के ससुराल का पानी भी न पीते.
                              सुनने में थोड़ा अज़ीब लगता,किन्तु व्यवहारिक रूप से देखा जाए तो इसके पीछे एक बहुत ही मजबूत दर्शन छिपा है...आज अधिकांश दाम्पत्य जीवन की असफलता की एक बहुत बड़ी वजह मायके पक्ष का नव दाम्पत्य जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप है...
                         मोबाइल युग में सम्पर्क के साधन की बेहतरीन उपलब्धता ने इस हस्तक्षेप को और अधिक बढ़ा दिया है...किसी भी नव विवाहिता को नए घर में सामंजस्य बिठाने थोड़ा वक्त तो लगता ही है,किन्तु शुरुआती आवेश में मायके पक्ष का अनावश्यक हस्तक्षेप आग में घी का कार्य करता है...
                             इतिहास गवाह है, चाहे रामायण में राम का वन गमन हो या फिर महाभारत में कुरुक्षेत्र का वो भीषण युद्ध...कहीं न कहीं मन्थरा और शकुनि के रूप में मायके पक्ष का अनावश्यक हस्तक्षेप ही एक प्रमुख वजह रही है...
             अभी शादी का सीजन चल रहा है,मायके पक्ष से मेरा नम्र निवेदन है कि नव विवाहिता को अपने नए जीवन,नए लोगों के साथ सामंजस्य बिठाने में सहयोग करें...न कि उनके मन में शंका,सन्देह और पूर्वाग्रह के बीज बोकर उन्हें विषाक्त कर दें...और नव विवाहिता को बस यही कहना चाहूंगा,कि वक़्त,अहमियत और अपनापन ही वो कसौटी है जिससे नए परिवार के साथ सहजता से जुड़ा जा सकता है...अब,आपका ससुराल ही आपकी नई पहचान है...
                    "लाख मुसीबत जमाने में है, 
                   रिश्ता तो बस साथ निभाने में है"....
प्रभाकर कुमार 'माचवे'  की कलम से...

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