रणभूमि में हारने से पहले मनोभूमि में हार गए थे पन्त...

रणभूमि में हारने से पहले मनोभूमि में हार गए थे पन्त....

कल रात मुंबई और दिल्ली के बीच हो रहे आईपीएल के एक अहम मुकाबले में यही देखने को मिला...दिल्ली के कप्तान ऋषव पन्त की टीम पूरी तरह दूसरी पारी के 15वें ओवर तक मैच को अपने गिरफ़्त में रखने में कामयाब लग रही थी,ऐसा जान पड़ रहा था कि इस मुक़ाबले को जीतकर भले वो मुंबई को हराने में कामयाब होगी लेकिन इस खेल का रोमांच ये था कि इस जीत के साथ वो बेंगलुरु के टीम के प्ले ऑफ में पहुंचने के मंसूबे पर पानी फेर देगी...

मुंबई के लिए ये मुकाबला प्रतियोगिता के दृष्टिकोण से उतना अहम नहीं था,और न ही इससे उनके अंकतालिका में खास परिवर्तन आने वाला था...इन सबसे इतर बेंगलुरु टीम के लिए मुम्बई का जीतना उनके प्लेऑफ में एंट्री दिलवा सकता था.. 

कुलदीप के गेंद पर ऋषव का ब्रेविस का कैच छोड़ने से ज्यादा नुकसान...

16वें ओवर में शार्दूल ठाकुर की पहली गेंद टीम डेविड के बल्ले को हल्का सा छूते हुए विकेटकीपर कप्तान ऋषव पन्त के हाथों में गयी,गेंदबाज़ के साथ साथी खिलाड़ियों ने भी अपील किया,जिसे अम्पायर के द्वारा ख़ारिज कर दिया गया,अगल-बगल के खिलाड़ियों ने कप्तान ऋषव पन्त को रिव्यु लेने की सलाह दी किन्तु पता नहीं क्यों, दो रिव्यु बचे होने के बावजूद उन्होंने नहीं लिया...और टीवी स्क्रीन पर जब रीप्ले में आउट होने की बात सामने आई तो ऋषव टूट गए...उन्हें अपनी गलती पर पछतावा होने लगा...

और उसके बाद टीम डेविड ने 11 गेंदों  पर 34 रन बनाकर पूरे समीकरण को ही मुंबई के पक्ष में कर दिया।

क्रिकेट में कप्तान के रूप में ऐसी गलती का होना कोई  बड़ी बात नहीं है...लेकिन इस घटना ने ऋषव को पूरी तरह झकझोर दिया... और उनके कंधे झुक गए...
सेनापति के द्वारा उसी पल मनोभूमि में हार मान लेना,पूरी टीम के उत्साह को कमजोर कर गया और मैच हारना तो बस एक औपचारिकता रह गयी...

ज़िन्दगी में भी अक्सर लोग रणभूमि में नहीं हारते, उनकी हार तो पहले मनोभूमि में ही हो जाती....

प्रभाकर कुमार 'माचवे' की कलम से...

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