घर हो या देश..बेहतर प्रबन्धन तो एक स्त्री ही कर सकती !


घर हो या देश...बेहतर प्रबन्धन तो एक स्त्री ही कर सकती है !

जी, हां दोस्तों... इस तस्वीर में भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नार्डिक देशों के प्रधानों के साथ हैं...जिनके पांच देशों में चार की प्रधान एक महिला है...नार्डिक देश जिसमें डेनमार्क,नॉर्वे,स्वीडन,फ़िनलैंड,आइसलैंड देश शामिल हैं,ये सभी देश वैश्विक सूचकांक के हर अच्छे आयाम में अव्वल हैं....चाहे वो विश्व खुशहाली रिपोर्ट हो या फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता... शिक्षा हो या फिर स्वास्थ्य...

मुझे मोदीजी की इस यात्रा से पहले इस सन्तुलित व आदर्शवादी प्रगति की मूल वजह वहां की जलवायु जान पड़ती थी,मगर अब मैं पूरे दावे से ऐसा कह सकता हूँ,जिस इलाके में महिलाएं राजनीतिक,आर्थिक,प्रशासनिक,सामाजिक और बौद्धिक रूप से सबल होंगी,राष्ट्र के प्रगति में जितनी बड़ी भूमिका महिलाओं की होगी,निश्चित तौर पर वहां बेहतर प्रबंधन और सन्तुलित विकास कार्यक्रम बनेंगे...वो राष्ट्र उतनी ही शांति से प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा....

भारत जैसे देश में नारी को राजनीति में प्रत्यक्ष भागीदारी के लिए तैयार होना होगा,आधी आबादी को विकास पथ से दूर रखकर कभी भी कोई देश अव्वल नहीं हो सकता....
एक लड़की का जन्म सिर्फ़ चूल्हा और दूल्हा के बीच पेंडुलम बनने के लिए नहीं हुआ है....

प्रभाकर कुमार 'माचवे'  की कलम से...

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