समय का गुल्लक..

                    "समय का गुल्लक"

समय वो अनमोल धन है, जिसे एक बार खो जाने के बाद कभी भी पाया नहीं जा सकता...हम इसकी अहमियत को बचपन से नज़रअंदाज़ करते आते हैं,क्योंकि कभी हमें ऐसा लगता ही नहीं कि इसे भी बचाया जा सकता,इसका भी निवेश किया जा सकता...
                         दुनिया के हर सफल व्यक्ति ने इसके महत्व को समझा है, यक़ीनन तभी वो सफल हो सके हैं...आज सोशल मीडिया के इस दौर में रील्स और fb स्क्रॉल करते हुए कैसे वक़्त गुज़र जाता ये पता ही नहीं चलता...और अचरज़ की बात ये है कि फिर अगले दिन हम वही काम करते जिसकी वजह से पिछले दिन पछतावा हुआ था.. चाहे व्हाट्सएप्प पर दोस्तों के बीच बेफिजूल की बकैती हो या फिर बिना मतलब के दिन भर न जाने किन ख्यालों में खोए रहना.. 

फोन पर घण्टों किसी से बेमतलब की बात करके न सिर्फ़ हम अपना बल्कि सामने वाले का भी ऊर्जा और समय नष्ट करते हैं,भले ही सामने वाला आपकी इज्जत करता हो लेकिन आपके इस व्यवहार से उसे दुःख तो जरूर होता है....

कमाल की बात ये है,कि जो लोग अपने दिन का घण्टों समय मोबाइल फोन पर बीता देते, उनसे यदि कोई काम करने को कहिये तो साफ लहज़े में वो कहते कि मेरे पास तो इतना समय ही नहीं...असल में, कुछ हद तक वो सही ही कह रहे होते क्योंकि उनके पास निश्चित तौर पर इतना समय नहीं होता ! 
                उनके पास जो भी समय होता वो छोटे-छोटे टुकड़े में होता और उस वक़्त को समय की गुल्लक में डालकर बचाना उन्हें नहीं आता...
                                   जी, हाँ दोस्तों... समय की गुल्लक...थोड़ा अजीब लगा होगा सुनकर आपको...पैसों की गुल्लक के बारे में तो बचपन से सुनते आ रहे,लेकिन समय की गुल्लक ये शायद पहली बार सुना होगा आपने !

दुनिया का सबसे कीमती खज़ाना को सहेजने वाला गुल्लक...समय की गुल्लक...बस, इस गुल्लक में समय को सहेजने के लिए तैयार हो जाएं...शुरुआत के लिए आने वाले सात दिनों तक अपनी दिनचर्या को थोड़ा नोट करें,आपको देखकर आश्चर्य होगा कि  हम कितने बेगैरत की तरह कुदरत के दिये सबसे अनमोल खजाने को बर्बाद कर रहें हैं....
        यक़ीन मानिये, "जो समय को बर्बाद करते हैं,एक दिन समय उनको बर्बाद कर देता है"....

प्रभाकर कुमार 'माचवे'  की कलम से...

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