द माउंटेनमैन "दशरथ मांझी"...
"जब तक तोड़ेंगे नहीं... तब तक छोड़ेंगे नहीं..."
जीवन के हर स्थिति में यह मूल मंत्र देने वाले माउंटेन मैन दशरथ मांझी का आज पुण्यतिथि है ...
इस इंसान ने साबित कर दिया कि "कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती है"और अपने पुरुषार्थ से इन्होंने वर्षों पुरानी कहावत को झूठा साबित कर दिया कि 'अकेला चना कभी भांड नहीं फोड़ सकता है"..अकेले ही पहाड़ को छेनी-हथौड़े से तोड़कर रास्ता बनाने वाले गया के छोटे से गांव गहलोर के रहने वाले दशरथ मांझी का जुनून आज के युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है ...
जो छोटी सी विफलता से घबराकर नया प्रयास करने में हिचकते हैं या फिर जीवन की छोटी सी असफलता को आत्महत्या का कारण बना लेते हैं ...
प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अंत तक योद्धा की तरह डटे रहने की प्रेरणा हैं द माउंटेन मैन दशरथ मांझी...
बाइस वर्षो तक अनवरत पहाड़ को चुनौती देना इतना सहज नहीं ...शुरुआत हुई होगी तो कितनों ने पागल घोषित कर दिया होगा इन्हें...
प्रेम की सच्ची इबारत इन्होंने पहाड़ तोड़कर लिख दी, जो इतिहास के सुनहरे अक्षरों में अंकित हो गया है ...
जीवन में आई अपनी परेशानी को जनसाधारण से जोड़कर जो समाधान ढूंढता है ,असल में वही महान बनता है... चाहे गांधी हो या मंडेला या फिर लिंकन... इन सब ने अपने जीवन को जनसाधारण की समस्यायों के साथ जोड़ दिया.
द माउंटेन मैन दशरथ मांझी पर बनी फिल्म "मांझी द माउंटेन मैन" में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने उनके व्यक्तित्व को न्याय पूर्ण तरीके से पर्दे पर दिखाया है और इस महान शख्सियत से पूरी दुनिया को रूबरू कराया....
माउंटेन मैन आपके जीवन की सबसे बड़ी सीख को मैंने गांठ बांध कर रख लिया है ...
"हार नहीं मानूंगा"....
प्रभाकर कुमार माचवे की कलम से...
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