नई शिक्षा नीति 2020

नई शिक्षा नीति 2020

पहली और सीधी बात स्पष्ट कर दूं,यह कोई विधेयक नहीं है जिसे लागू कर दिया गया है...यह बस एक शिक्षा फ्रेम है,पूरी तरीके से बस एक ड्राफ्ट है,मसौदा है...मतलब यह कि इसके सभी प्रावधानों को सरकार लागू करेंगी ये सोचना शायद बेबुनियाद और ख्याली पलाव पकाने के समान होगा...

मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदलकर फिर से शिक्षा मंत्रालय बदलने की योजना,जिससे ये मांग मान ली गयी है कि मानव कोई संसाधन नहीं..

कस्तूरी रँगन कमिटी के 480 पेजो के सुझाव के साथ देश के लाखों गणमान्य लोगों के सुझाव को 60 पेज के एक ड्राफ्ट में बदला गया है,जिसे पब्लिक डोमेन में नहीं रखा गया है..

इसे कस्तूरी रँगन की कमिटी के द्वारा दिये सुझावो के आधार पर तैयार किया गया है और NDA सरकार मूलतः जो बीजेपी प्रभुत्व वाली सरकार है वो इसे लागू करने का सोच रही है

,तो कुछ डर तो स्वाभाविक हैं..

1.क्या यह शिक्षा नीति RSS के मूलभूत विचार हिंदुत्व या भगवाकरण का प्रोत्साहन कर रही,क्या शिक्षा का मकसद देश को केंद्रीकृत करना बन जायेगा?

-तथ्यों और तर्को के आधार पर ये बातें 100% सत्य नहीं है,इस नीति में हिंदुत्व को बढ़ावा देने वाले किसी सीधे विचार की कोई सूचना नहीं मिलती, हां भारतीय संस्कृति शब्द का प्रयोग कई मर्तबा हुआ है जो किसी भी राष्ट्र के लिये जनोपयोगी ही है...

2.क्या भारत शिक्षा का प्राइवेटाइजेशन की ओर बढ़ रहा?

-मसौदे के आधार पर विश्लेषण करते हुए,यहां भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है,एक तरफ सरकार जीडीपी का बढाकर 6% हिस्सा का बात कर रही और दूसरी ओर उच्च शिक्षा में वैश्विक स्तर की 100 सबसे श्रेष्ठ यूनिवर्सिटी को देश मे संस्थान खोलने की मंजूरी के लिए सहमति देती है..

3.शिक्षा का मतलब सिर्फ तकनीकी शिक्षा बनता जा रहा,क्या यह नीति शिक्षा को व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास से जोड़ पाएगी?

-कुछ हद तक हां... क्योंकि मल्टी डिसिप्लिनरी एप्रोच यानी विषयों के मध्य अनुनासय सम्बन्ध की स्थापना व्यक्तिगव के विकास में सहायक हो सकती

अब आते हैं,आख़िर इस शिक्षा नीति में नया क्या?
सबसे पहले स्कूली शिक्षा--

1.RTE के विस्तार की संभावना-राइट टू एजुकेशन जो अभी 6 से 14 के लिए है उसे 3 से 18 बनाने की मंशा जो प्रशंसनीय है...

2.MDM के साथ ब्रेकफास्ट-स्कूली बच्चों को दोपहर के साथ सुबह का नाश्ता भी

3.DROP OUT RATIO को कम करने की तैयारी- विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बनी रहे, माध्यमिक शिक्षा तक सबको विद्यालय से जुड़े रखने की योजना

4.समान अवसर- जिसे पाना इतना आसान नहीं

5. ECE--EARLY CHILDHOOD EDUCATION शुरुआती शिक्षा 3 से 6 वर्ष की शिक्षा पर सरकार का पूरा ध्यान
"मिट्टी तैयार करना घड़े के लिए सबसे अहम"

6.शिक्षकों का उपयुक्त नियमबद्ध तरीके से चयन का प्रावधान

7.पहली से 5 वर्ग तक मातृभाषा में शिक्षा के साथ 2 अन्य भाषाओं का ज्ञान-इसमें कुछ नया नहीं शुरू से ही यही योजना रही है देश की,अन्य भाषाओं की शिक्षा ग्रामीण इलाकों में कैसे मुहैय्या होगी बड़ा सवाल

8.प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा की शुरुआत-CBSE और ICSE बोर्ड के बच्चे इस आधार पर पढ़ रहे,धरातल पर कितना व्यवहारिक तरीके से कार्यान्वयन हो रहा ये हम सबसे छुपा नहीं

स्कूली शिक्षा सम्बन्धी एक अहम बात,ENGLISH MEDIUM SCHOOL के ठेकेदारों को समाप्त करना,आज की तारीख में असम्भव...
मूलभूत बात, अभिभावकों को ये मानना होगा, समझना होगा,स्वीकारना होगा

"अंग्रेजी सिर्फ एक भाषा है,कोई ज्ञान नहीं"....

उच्च शिक्षा--

1.विषयों के बीच वैकल्पिक चयन का प्रावधान-कोई भी विद्यार्थी अपनी रुचि के विषयों को पढ़ सकता है,हां मुख्य विषय और अन्य विषय के प्रावधान अवश्य होंगे...इससे व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के साथ विद्यार्थियों के मानसिक तनाव में कमी आएगी।

2.CREDIT TRANSFER--यदि आप किसी विषय से स्नातक की पढ़ाई कर रहे, मगर 1 या 2 वर्षो में आप उस विषय से बोझिल हो रहे तो आप सर्टिफिकेट या डिप्लोमा ले सकते हैं और अन्य विषय को लेकर अपनी पढ़ाई को जारी रख सकते

3.राष्ट्रीय शिक्षा आयोग कर गठन का प्रावधान-जिसमें हर राज्य को शामिल किया जाएगा और जिसकी अध्यक्षता देश की शिक्षा मंत्री करेंगे

4.UGC जो अभी देश की उच्च शिक्षा की इकलौती कर्ताधर्ता है,उसके कार्य का वर्गीकरण करने की बात की जा रही

5.वैश्विक स्तर की शुरुआती 100 प्रतिष्ठित संस्था को भारत में अपने विश्वविद्यालय खोलने की अनुमति पर सहमति--इसके कई मायने हो सकते हैं,मगर निश्चित तौर पर शिक्षा की गुणवत्ता के साथ उसकी कीमत भी बढ़ेंगी

6.Fee cap लगाने की तैयारी- मतलब उच्च शिक्षण संस्थानो की अधिकतम रकम वसूली का निर्धारण किया जा सकता

और भी कई सारे अच्छे और उपयोगी विचार हैं,मगर इस नीति से कुछ सन्देह भी उत्पन्न होते हैं...मसलन

1.RTE को dilute किया जा सकता,सुविधाओ में कमी होना लाजमी है

2.EWS की आरक्षित 25% सीट खतरे में

3.जीडीपी का 6% देने की बात  जो अभी 4 से 4.5% के करीब तो की जा रही मगर वैसे लोग जो पहली बार शिक्षा की सीढी पर चढ़कर अपने जीवन की दशा बदलना चाहते उनके लिए कोई खास प्रावधान नहीं

4.शिक्षा के व्यापारीकरण का बढ़ता खतरा

5.विदेशी शिक्षण संस्थान को आमंत्रण कहीं अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के समान तो नहीं...

सन्देह होना लाज़मी है,और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है मगर इसका ये मतलब नहीं कि कोई विपक्ष में  हो तो आंख मूंदकर विरोध करना शुरू कर दें,विपक्ष का मतलब सिर्फ विरोध नहीं होता...

नई शिक्षा नीति 2020,कागज पर बहुत सुंदर नीति,मगर जमीन पर उतरेगी कब,पता नहीं...कितना बदलाव आएगा पता नहीं,और ये तो तय है ये सब बिल्कुल बदल जायेगा देश हुनरमन्द हो जाएगा,सबको रोजगार मिल जाएगा,सबका जीवन खुशहाल हो जाएगा...
एक झटके में ऐसा कुछ नहीं होगा..ये कोई जादू की छड़ी नहीं...

हां इतना जरूर कह सकता सरकार की नीयत साफ लग रही इस मुद्दे पर,मसौदा अच्छा है...

मगर फिर,"हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और होते हैं".....
प्रभाकर कुमार माचवे की कलम से....

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