अकेलापन:- समस्या और समाधान...
अकेलापन...आज की तारीख़ में एक बहुत बड़ी समस्या बनते जा रही है।शहर की यह बीमारी अब धीरे-धीरे गांव में भी अपना पांव पसार रही है।जीवन में आधुनिकता का तेजी से प्रवेश खुद को खुद तक ही सीमित करता जा रहा है और इन सबसे खुद के भीतर एक हीनता का भाव जन्म ले लेता है। यह हीनता का भाव धीरे-धीरे आपको समूह से विलग कर भीतर निराशा भर देता है।
वर्तमान सन्दर्भ में,युवावस्था में आत्महत्या की बढ़ती घटना,मानसिक बीमारियों का सर्वसामान्य होना,स्वभाव में चिड़चिड़ापन,मानसिक तनाव,घरेलू हिंसा और बच्चों के प्रति निष्ठुर व्यवहार के पीछे इसी अकेलेपन के नैराश्य की भूमिका है।
आधुनिकता की अंधी दौड़ में अस्तित्व की मूलभूत आयाम से खुद को दूर करना इसकी बहुत बड़ी वजह है।
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है,आपसी सुख-दुःख में शामिल होना इसकी नैसर्गिक प्रवृति है। अस्तित्व के मूल को भूलकर कोई भी अपने जीवन में खुशियों के फूल नहीं खिला सकता। सुविधाएं जीवन में सुख दे सकती है मगर आनन्द नहीं...
समस्या बहुत गम्भीर है,देश के युवा वर्ग का यूं हताश होना कहीं न कहीं जीवनशैली में कुछ मूलभूत बदलाव की मांग करता है।
👉 जीवन को मूल यानी प्रकृति के साथ जोड़ना बेहद जरूरी है।
👉 बाहरी खेल जैसे फुटबाल,कबड्डी,क्रिकेट को दिनचर्या में शामिल किया जाए...
👉 भारतीय संस्कृति में पर्व त्योहार का विशेष महत्व है,अतः इन अवसरों पर खुद को सामाजिक ढांचे से जोड़ने का प्रयास किया जाए।
👉विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक के किताबों के अलावा अन्य कहानियों के किताबों को पढ़ना भी अत्यंत लाभकारी है।
👉 समय-समय पर अच्छी मनपसंद फ़िल्म देखना,वेब सीरीज देखना न सिर्फ नैराश्य से दूर करता बल्कि समझ में परिपक्वता भी लाता है।
👉 अपने परिवार के बड़े बुजुर्गों के साथ बैठकर उनके समय की कहानी सुनना भी बेहतर होता,इससे बच्चे और बूढ़े दोनो के नैराश्य के भाव समाप्त होते और साथ ही साथ अतीत की यात्रा से आपके भीतर भी न सिर्फ सामाजिक बल्कि आर्थिक,राजनीतिक और बौद्धिक समझ आती।
👉वक़्त मिले तो जरूर कुछ लिखें-लिखना एक बेहतरीन कला है,लिख वही सकता है जो समझता हो।
👉डायरी लिखने की आदत विकसित करें,इससे खुद का निरीक्षण करने के साथ साथ सत्य से साक्षात्कार होता है।
👉 मधुर संगीत सुनें- संगीत अंतर्मन को बहुत ही कम समय मे प्रफुलित कर सकती है।
👉 कुछ रोचक कार्य करें,जैसे कोई साइंस प्रोजेक्ट बनाये,कोई फाइन आर्ट्स,पेंटिंग,कविता लिखना,निबंध लिखना..
👉 आत्मकथा पढ़ने की आदत विकसित करें,ये कार्य भीतर से आपको साहस,धैर्य और हार न मानने की प्रेरणा देता रहेगा।
👉 जिन्हें भोजन पकाने में रुचि है,जरूर सप्ताह में एक दिन का भोजन बनाये और सबको परोसकर खिलाएं
👉 दिनचर्या में योग और ध्यान को शामिल करें।
👉 दोस्तों के संग समय-समय पर मिलन समारोह रखे,गप्पे करें...पुरानी हसीन यादों को जिंदा करें।
👉 खूब हँसे- इस कार्य मे कोई कॉमेडी शो भी मदद कर सकता।
👉 दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहें- देने की खुशी का आनन्द इस संसार मे सबसे बड़ी खुशी है।
👉 बच्चों के साथ कुछ वक्त बिताएं- बच्चे की निश्छल मुस्कान तनाव को पल भर में दूर कर सकती है।
👉जीवन में पत्नी,प्रेमिका या मां से दिल खोलकर खुशी खुशी बात करें।
👉 यदि आप शहर के किसी कम्पनी में काम करते तो कम्पनी में ही सप्ताह में एक दिन जरूर किसी छोटे पार्टी का आयोजन करें।
👉 शहर के निवास स्थान के आस पास के परिवारों को जोड़कर सोसाइटी बनाये,जिसमे अलग-अलग समय अलग-अलग उम्र वर्ग के लोगो के लिए आयोजन करते रहें।
👉 महिलाओं को आपस में गपशप में भाग लेते रहना चाहिए,सास की बुराई,बहु की निंदा ये सभी मन की निराशा को दूर करने का उपयुक्त साधन है।
👉विद्यालय में पढ़ाई के अलावा भी खेलकूद,पेंटिंग,भाषण,निबंध,प्रोजेक्ट सम्बन्धी प्रतियोगिता समय समय पर होते रहनी चाहिए।
और भी कई सुझाव हो सकते हैं,यदि आपकी नजर में कुछ नया हो तो जरूर कमेन्ट करके बताएं...आपके सुझाव का बेसब्री से इंतेज़ार रहेगा...
प्रभाकर कुमार माचवे की कलम से...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें