ये ठप्पा नहीं है,सच की खोज में निकले के गाल पर तमाचा है...
व्यवस्था ने अपना ठप्पा लगा ही दिया...और साबित कर दिया न्याय को अब भी संविधान के किसी न किसी प्रावधान के इस्तेमाल के ज़रिए ठेंगा दिखाया जा सकता है....
ये ठप्पा सिर्फ #IPSVinayTiwari के हाथों पर नहीं है बल्कि ये तो सच की खोज में निकले हर उस शक्श के गालों पर लगा तमाचा है जो जानना चाहता है कि उसका होनहार #SushantSinghRajput कैसे मर गया?.
.क्या उसने आत्महत्या किया या किसी ने आत्महत्या के लिए उकसाया या फिर कुछ और ही कहानी है..
.राजनीति ने भी अपना रुख तय कर लिया है किसे इस मुद्दे को कब कितनी हवा देनी है,कब भावनाओ को वोट में बदलना है और कहां...
ये सब सियासत के बिसात पर सियासतदान के इशारे पर नाचते मोहरे तो नहीं..
.क्या बॉलीवुड और सियासत का गठजोड़ इसी तरह ठप्पा लगाकर हमारे गालों पर तमाचा जड़ता रहेगा...
जनता कब तक यूं ही बदहवास ये नंगा नाच सिर्फ तमाशबीन बनकर देखती रखेगी?...
क्या सच को जानने का उसकी खोज में निकलने का भी हक़ नहीं है हमें?...
सवाल गहरे हैं,ये सिर्फ अब एक कलाकार की मौत का सवाल नहीं रह गया,ये सच को सामने लाने का सवाल बन गया है?...
सच बेपर्दा हो...सच जो केवल सच हो...
प्रभाकर कुमार माचवे की कलम से
#prabhakarkumarmachvey
#JusticeForSushant #
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें