एक अनूठी प्रेम कहानी पार्ट-2



रोहित ने उससे ज्यादा सवाल करना मुनासिब नहीं समझा...मगर,पहली ही मुलाकात में रोहित पर उस लड़की का जादू चढ़ गया था...और आज वो कुछ ज्यादा ही खुश दिख रहा था...

तभी उस लड़की की सहेली आयी और उनदोनों ने एक-दूसरे को गुलाब देकर गले लगाया
रोहित ने जब देखा गुलाब अपनी सहेली को दिया जा रहा...पता नहीं,उसे एक शुकुन का एहसास हुआ और दिल में सम्भावना की एक जोर सी घण्टी बजी...

ज़िन्दगी में पहली बार रोहित को ऐसा एहसास हो रहा था,वो हड़बड़ाना नहीं चाह रहा था...इतने वर्षों तक कोई भी लड़की उसे इतनी अच्छी नहीं लगी थी,मगर इस लड़की में जरूर कुछ खास था...ऐसा लग रहा था कि इसके साथ कुछ न कुछ जनमों का नाता है...मगर,अफ़सोस वो अब तक उसका नाम तक नहीं जान पाया था...
तभी, बस ठीक हो गया...और सभी उस बस पर चढ़ गए...बस पर काफी भीड़ होने की वजह से रोहित को जगह नहीं मिल पाई,उसकी सीट पर एक बूढ़े व्यक्ति बैठ गए थे, जिन्हें उठाना रोहित को ठीक नहीं लगा...
रोहित खड़े होकर बार-बार उस लड़की को चोरी की निगाहों से देखता आ रहा था,उसकी खिलखिलाती हँसी और हँसी के साथ गालों पर बनने वाले डिंपल पर तो रोहित का दिल एक नहीं कई बार आने लगा था...

मन ही मन रोहित सोच रहा था,कितनी प्यारी है ये...कितनी प्यारी है इसकी हँसी...
कुछ देर बाद...बस कॉलेज गेट पर पहुंच चुकी थी... वहां रोहित के साथ वो लड़की और उसकी सहेली भी उतरी...

उस लड़की की सहेली कुछ ज्यादा ही बिंदास और नए जमाने की लग रही थी जो उसके पोशाक से साफ पता चल रहा था...उसने रोहित को आवाज़ देते हुए कहा, ओ मिस्टर हैंडसम... तुम भी इसी कॉलेज में...
रोहित हिचकते हुए कहता है ... जी इसी में, english literature... और आप ?
लड़की की सहेली जवाब देती है, what a coincidence ! We also in english literature...

और अपना हाथ हैंडशेक के लिए रोहित की ओर बढ़ाती है...
रोहित भी पूरे उत्साह से हाथ बढ़ाता है...
 और कहता है, माई सेल्फ रोहित अरोरा...
सामने से लड़की कहती है, डिंपल धुंकिया

Nice to meet you, we are friends...
 रोहित अपना हाथ उस प्यारी लड़की की ओर बढ़ाता है, लेकिन वो दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते कहते हुए कहती है..
मेरा नाम काव्या वर्णबाल...
 रोहित भी नमस्ते कहकर ही जवाब देता है... आपलोगों से मिलकर अच्छा लगा...
 रोहित के दिमाग में... काव्या...यह नाम दिमाग और दिल के बीच अपनी यात्रा करने लगता है...और लड़की का हाथ जोड़कर नमस्ते कहना...उफ़्फ़... ये दृश्य उसके मन मस्तिष्क में ऐसे बैठ जाते हैं,जैसे वही मिस अरोरा बनने वाली हो...

लड़के भी न कितने अज़ीब होते हैं,पहली मुलाकात में उनकी रूहानी कल्पनाएं कहाँ-कहाँ तक भटकने लगती है....
 अपने कॉलेज के पहले की व्यस्त कार्यक्रम से जब शाम को रोहित घर लौटता है तो उसके चेहरे पर कोई थकान नहीं होती...बल्कि एक अलग ही चमक होती है... शायद,उस चमक की वजह काव्या थी,उसकी वो हँसी,उसकी वो सादगी...

आज रात को उसे नींद ही नहीं आ रही थी...हर क्षण उसे आने वाले कल की कल्पनाएं रोमांचित कर रही थी...और वो दूर तलक तारों में सबसे चमकता तारा जिसे वो अपनी माँ मानता था,उनसे घण्टों बातें करते रहा...उसे काव्या में अपनी माँ की झलक दिख रही थी,वही खिलखिलाती हँसी,वही सादगी...जिनके किस्से वो अपनी मौसी से बचपन से सुनते आ रहा और फिर न जाने कब सो गया उसे पता भी नहीं चला...

शेष अगले पार्ट में...
Prabhakar Kumar Machvey की कलम से...

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