पत्थरबाज़ी का जुम्मा कनेक्शन !

पत्थरबाज़ी का जुम्मा कनेक्शन !


नमस्ते दोस्तों !
ये हर 'शुक्रवार' को कोई ना कोई कांड धारावाहिक की तरह क्यों रिलीज़ हो रहा है भाई?

 देश के अलग-अलग इलाकों में जुम्मे की नमाज़ के बाद पिछले 2-3 जुम्मे से  मुस्लिम अनुयायियों के द्वारा पत्थरबाजी और आक्रोशक जुलूस निकालें जा रहे हैं...इसके पीछे कभी किसी बीजेपी नेत्री के बयान का हवाला दिया जाता तो कभी पाकिस्तानी के पूर्व प्रधानमंत्री के मृत्यु के अफवाह का...मगर, मुझे इस पत्थरबाज़ी में जुम्मा कनेक्शन दिख रहा है.. 

आज, रांची के ही मामले को लें, तो नमाज़ पढ़कर लौट रहे लोग एकाएक बिना किसी पूर्व सूचना के पथरबाज़ी करते हुए किसी जुलूस का हिस्सा कैसे बन जाते हैं,कौन सी ऐसी एकात्मक संगठन है जो इन्हें इतनी जल्दी एकजुट कर सकती !

पिछले सप्ताह भी कानपुर में नमाज़ पढ़कर आने के बाद,एकाएक इतनी बड़ी संख्या में लोग जुलूस का हिस्सा बनकर पथरबाज़ी कैसे करने लगें !

क्या मस्जिद में जुम्मे की नमाज़ के बाद इन्हें कोई सूचना दी जाती है ?

क्या कोई अलगाववादी ताकत इनके भावनाओं को भड़काकर देश के माहौल को बिगाड़ना चाह रही है ?

वोट के धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए,कहीं सत्ता पक्ष के द्वारा ही कोई प्रायोजित रणनीति का यह हिस्सा तो नहीं !
 जिससे सत्ता पक्ष आम जनता का ध्यान महंगाई, शिक्षा,बेरोजगारी और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों से भटकाकर 2024 के लिए अपना राजनीतिक मंच तो नहीं बना रही !

क्या विपक्ष देश में ऐसी घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देकर इसे एक चुनावी मुद्दा तो नहीं बनाना चाहता ?

 क्या इन घटनाओं का कोई पाकिस्तानी कनेक्शन तो नहीं,जिससे वो भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनती अच्छी छवि को बिगाड़ने का प्रयास कर रहा ?

सवाल कई हैं, मगर इस पत्थरबाजी का कहीं न कहीं जुम्मा कनेक्शन धार्मिक शिक्षा और मजहबी सांस्कृतिक संरक्षण के मौलिक अधिकार के आड़ में देश मे साम्प्रदायिक उन्माद खड़े करने की कोशिश कर रहे हैं...देश की ख़ुफ़िया एजेंसी को बहुत ही सतर्कता के साथ इन मामलों की जांच करनी चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी दण्ड मिलनी चाहिए...

भय बिन होई न प्रीत !

प्रभाकर कुमार 'माचवे' की कलम से ....

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