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मई, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हिंदी माध्यम के भी अच्छे दिन आएंगे !

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हिंदी माध्यम के भी अच्छे दिन आएंगे ! जी हाँ दोस्तों... 15 वर्ष पहले तक  देश के प्रशासनिक सेवा में हिंदी पट्टी के युवाओं  का धाक हुआ करता था, बिहार और उत्तर प्रदेश के युवाओं का एक मात्र सपना जो उनकी ज़िंदगी बन जाता था वो होता था IAS बनना... मगर, परीक्षा में हुई बदलाव ने उन्हें पूरी प्रतियोगिता से इस कदर बाहर किया जैसे भारतीय हॉकी टीम जो एक समय मिट्टी के मैदान पर विश्व विजेता हुआ करती थी और मैट पर फिसड्डी हो गयी...कुछ वैसा ही हाल UPSC की परीक्षा में हिंदी भाषी प्रतियोगियों का हुआ..  मगर, अब बदलते हालात को जिस तरह हॉकी में हम अपने पक्ष में करने में धीरे-धीरे ही सही सफल हो रहे...ठीक उसी प्रकार अब उम्मीद लगाई जा रही कि हिंदी माध्यम से भी UPSC की असाध्य वीणा को अब साधा जा सकता है.. हालात उतने संतोषजनक तो नहीं,मगर एक उम्मीद का दीया कई वर्ष पूर्व Nishant Jain निशान्त जैन  के रूप में जला था...और अब रवि सिहाग के रूप में एक जुगनू टिमटिमाता हुआ दिख रहा है... पिछले 12-15 वर्षों में शीर्ष 20 में सिर्फ  इन 2 हिंदी भाषी  प्रतियोगी का होना मेरे इस बात...

रणभूमि में हारने से पहले मनोभूमि में हार गए थे पन्त...

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रणभूमि में हारने से पहले मनोभूमि में हार गए थे पन्त.... कल रात मुंबई और दिल्ली के बीच हो रहे आईपीएल के एक अहम मुकाबले में यही देखने को मिला...दिल्ली के कप्तान ऋषव पन्त की टीम पूरी तरह दूसरी पारी के 15वें ओवर तक मैच को अपने गिरफ़्त में रखने में कामयाब लग रही थी,ऐसा जान पड़ रहा था कि इस मुक़ाबले को जीतकर भले वो मुंबई को हराने में कामयाब होगी लेकिन इस खेल का रोमांच ये था कि इस जीत के साथ वो बेंगलुरु के टीम के प्ले ऑफ में पहुंचने के मंसूबे पर पानी फेर देगी... मुंबई के लिए ये मुकाबला प्रतियोगिता के दृष्टिकोण से उतना अहम नहीं था,और न ही इससे उनके अंकतालिका में खास परिवर्तन आने वाला था...इन सबसे इतर बेंगलुरु टीम के लिए मुम्बई का जीतना उनके प्लेऑफ में एंट्री दिलवा सकता था..  कुलदीप के गेंद पर ऋषव का ब्रेविस का कैच छोड़ने से ज्यादा नुकसान... 16वें ओवर में शार्दूल ठाकुर की पहली गेंद टीम डेविड के बल्ले को हल्का सा छूते हुए विकेटकीपर कप्तान ऋषव पन्त के हाथों में गयी,गेंदबाज़ के साथ साथी खिलाड़ियों ने भी अपील किया,जिसे अम्पायर के द्वारा ख़ारिज कर दिया गया,अगल-बगल के खिलाड़ियों ने कप्तान ऋषव...

एक बच्चे की फ़रियाद बिहार के मुख्यमंत्री से

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"हमें धन-दौलत नहीं,हमें शिक्षा दे दीजिए...ताकि हम पढ़कर लिखकर आईएएस बनकर अपने बिहार को बेहतर बना सकें"... जी हां... दोस्तों...ये फरियाद हैं  बिहार के नालन्दा जिले के अंतर्गत हरनौत के महज़ 11 वर्ष के एक छोटे से लड़के सोनू की...बिहार के माननीय मुख्यमंत्री जी से... ऐसा जिगरा, ऐसी फ़रियाद एक बिहारी ही कर सकता है...       आज एक चन्द्रगुप्त शासन से सच्ची व अच्छी शिक्षा की मांग करके खुद को काबिल बनाकर बिहार को बेहतर बनाने की हुंकार भर रहा है...क्योंकि बिहार के चन्द्रगुप्त को यह भरोसा है कि वो अपनी काबिलियत से बिहार को फिर से वही गौरव का दर्जा दिलवा सकता है...                             बिहार के माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी इस फ़रियादी की आवाज़ में आप बिहार के दर्द को समझें, आधारभूत शिक्षा व्यवस्था पर तनिक विशेष ध्यान देने की कृपा करें...शिक्षा वो हथियार है जिससे बिना रक्त बहाए हम फिर से अखण्ड साम्राज्य की स्थापना कर सकते हैं...बिहार की दिशा व दशा को बदलने की एक मात्र कुंजी शिक्षा ही है.... ...

सिद्धार्थ से बुद्ध की यात्रा

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दुनिया के पहले धर्म वैज्ञानिक के पावन जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित ! बुद्ध...यह नाम सुनते ही मस्तिष्क पटल एक यात्रा की तस्वीर खींच जाती है..."सिद्धार्थ से बुद्ध तक का सफ़र"... एक ऐसा राजकुमार जिसने जीवन में कभी दुःख नहीं देखा था,भौतिक संसार की हर सुख सुविधाएं उसके पास थी...लेकिन,फिर भी उसे किसी और की तलाश थी...                         भौतिकता की संकीर्णता और क्षुद्रता को परिलक्षित करता है यह सफ़र... बुद्ध ने चेतना के वजूद को इतनी वैज्ञनिकता से स्थापित किया है,कि आज  भी रहस्य बनकर ही हमारे सामने है,कि कोई मनुष्य अपने भीतर इतनी सूक्ष्मता से यात्रा कैसे कर सकता है! बुद्ध ने कभी भी अपने सत्य को दूसरों पर थोपने का प्रयास नहीं किया,उन्होंने सदैव माना कि एक गुरु होने के नाते वो अपने शिष्यों में सत्य की खोज के प्रति इच्छा को जीवित भर ही कर सकते ,सत्य के मार्ग पर चलना तो उन्हीं को है...                    वर्तमान समय में ज्ञान का जो बाज़ारीकरण हुआ है,उससे आध्यात्मिकता भी बस ...

अलसंख्यक समाज किन्तु भारत के विकास में सबसे आगे !

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वो सम्प्रदाय जो अपने अल्पसंख्यक होने का रोना नहीं रोते, बल्कि देश की प्रगति में बढ़-चढ़ हिस्सा लेने को लालायित रहते हैं...               वो सम्प्रदाय जिनकी भारत की कुल आबादी में हिस्सेदारी मात्र 0.37% है और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इनकी भारत के कुल टैक्स में हिस्सेदारी लगभग 24% है..   जी हां, दोस्तों...मैं बात कर रहा "जैन सम्प्रदाय"की...मुझे इस बात का गर्व है,कि भले ही मेरा जन्म किसी जैन परिवार में नहीं हुआ लेकिन तीर्थंकर महावीर विद्या मंदिर में पढ़कर सात्विकता और राष्ट्रप्रेम ने मेरी आत्मा तक को सिंचित किया है... भगवान महावीर स्वामी के त्याग,संयम और संकल्प से सिद्धि के मंत्र ने मेरे जीवन को सत्मार्ग की ओर प्रेरित किया है...बारूद की ढ़ेर पर बैठी इस दुनिया को यदि कोई बचा सकता है वो है सत्य व अहिंसा का सिद्धांत... आज भारत के हर प्रतिष्ठित कार्यों में अपनी श्रेष्ठ भूमिका देकर यह समाज पूरे विश्व में अपनी दिव्य पहचान बनाने में सफल हुआ है...पूरे भारत में 16000 पंजीकृत गौशालाओं में से 12000 का संचालन जैन समाज के द्वारा हो रहा है,ये आंकड़े इ...

समय का गुल्लक..

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                    "समय का गुल्लक" समय वो अनमोल धन है, जिसे एक बार खो जाने के बाद कभी भी पाया नहीं जा सकता...हम इसकी अहमियत को बचपन से नज़रअंदाज़ करते आते हैं,क्योंकि कभी हमें ऐसा लगता ही नहीं कि इसे भी बचाया जा सकता,इसका भी निवेश किया जा सकता...                          दुनिया के हर सफल व्यक्ति ने इसके महत्व को समझा है, यक़ीनन तभी वो सफल हो सके हैं...आज सोशल मीडिया के इस दौर में रील्स और fb स्क्रॉल करते हुए कैसे वक़्त गुज़र जाता ये पता ही नहीं चलता...और अचरज़ की बात ये है कि फिर अगले दिन हम वही काम करते जिसकी वजह से पिछले दिन पछतावा हुआ था.. चाहे व्हाट्सएप्प पर दोस्तों के बीच बेफिजूल की बकैती हो या फिर बिना मतलब के दिन भर न जाने किन ख्यालों में खोए रहना..  फोन पर घण्टों किसी से बेमतलब की बात करके न सिर्फ़ हम अपना बल्कि सामने वाले का भी ऊर्जा और समय नष्ट करते हैं,भले ही सामने वाला आपकी इज्जत करता हो लेकिन आपके इस व्यवहार से उसे दुःख तो जरूर होता है.... कमाल की बा...

मायके का अनावश्यक हस्तक्षेप दाम्पत्य जीवन की असफलता का मूल कारण

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लड़की पक्ष वाले लड़की के ससुराल का पानी भी न पीते.                               सुनने में थोड़ा अज़ीब लगता,किन्तु व्यवहारिक रूप से देखा जाए तो इसके पीछे एक बहुत ही मजबूत दर्शन छिपा है...आज अधिकांश दाम्पत्य जीवन की असफलता की एक बहुत बड़ी वजह मायके पक्ष का नव दाम्पत्य जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप है...                          मोबाइल युग में सम्पर्क के साधन की बेहतरीन उपलब्धता ने इस हस्तक्षेप को और अधिक बढ़ा दिया है...किसी भी नव विवाहिता को नए घर में सामंजस्य बिठाने थोड़ा वक्त तो लगता ही है,किन्तु शुरुआती आवेश में मायके पक्ष का अनावश्यक हस्तक्षेप आग में घी का कार्य करता है...                              इतिहास गवाह है, चाहे रामायण में राम का वन गमन हो या फिर महाभारत में कुरुक्षेत्र का वो भीषण युद्ध...कहीं न कहीं मन्थरा और शकुनि के रूप में मायके पक्ष का अनावश्यक हस्तक्षेप ...

घर हो या देश..बेहतर प्रबन्धन तो एक स्त्री ही कर सकती !

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घर हो या देश...बेहतर प्रबन्धन तो एक स्त्री ही कर सकती है ! जी, हां दोस्तों... इस तस्वीर में भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नार्डिक देशों के प्रधानों के साथ हैं...जिनके पांच देशों में चार की प्रधान एक महिला है...नार्डिक देश जिसमें डेनमार्क,नॉर्वे,स्वीडन,फ़िनलैंड,आइसलैंड देश शामिल हैं,ये सभी देश वैश्विक सूचकांक के हर अच्छे आयाम में अव्वल हैं....चाहे वो विश्व खुशहाली रिपोर्ट हो या फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता... शिक्षा हो या फिर स्वास्थ्य... मुझे मोदीजी की इस यात्रा से पहले इस सन्तुलित व आदर्शवादी प्रगति की मूल वजह वहां की जलवायु जान पड़ती थी,मगर अब मैं पूरे दावे से ऐसा कह सकता हूँ,जिस इलाके में महिलाएं राजनीतिक,आर्थिक,प्रशासनिक,सामाजिक और बौद्धिक रूप से सबल होंगी,राष्ट्र के प्रगति में जितनी बड़ी भूमिका महिलाओं की होगी,निश्चित तौर पर वहां बेहतर प्रबंधन और सन्तुलित विकास कार्यक्रम बनेंगे...वो राष्ट्र उतनी ही शांति से प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा.... भारत जैसे देश में नारी को राजनीति में प्रत्यक्ष भागीदारी के लिए तैयार होना होगा,आधी आबादी को विकास पथ से दूर रखकर कभी भी कोई...