वाह रे ! कोटा नगरी...सच में फैक्ट्री हो...फैक्ट्री...
वाह रे ! कोटा नगरी...सच में, फैक्ट्री हो ...फैक्ट्री...
कोटा फैक्ट्री....जी, हां यह एक फैक्ट्री ही है जहां इंसानी बच्चें को मशीन बनाना जाता है...उसकी संवेदनाओ को मारकर, उसके भीतर के मनुष्यत्व को मारकर , उसके सपनों को मारकर, बस...एक प्रतिस्पर्धी बनाया जाता है...
आपको लग रहा होगा, ऐसा क्या है इस तस्वीर में ?
यह एक सीलिंग फैन की तस्वीर है, जिसे एक जाली से ढक दिया गया है...
आपके मन में सवाल आया होगा, आख़िर पंखे को जाली से ढंकने की क्या जरूरत ?
जी हां,दोस्तों ...पंखे को जाली से ढका है ताकि कोई बच्चा जिसे मशीन बनाने की अंधी चाहत में उसके माता-पिता इंजीनियरिंग और मेडिकल की प्रवेश प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की माया नगरी में भेज देते हैं...और इस माया नगरी में प्रवेश के बाद बच्चा बच्चा नहीं रहता मशीन बन जाता है...उसे बड़े सलीके से मशीन बनाया जाता...
अपने दिमाग पर पड़ने वाले दबाव से परेशान होकर,जब वो अंधेरे कमरे में चीखता है तो उसकी चीख बाहर सुनाई नहीं देती,वो भीतर ही भीतर घुट जाता है...
न वो चीख बच्चें के माता-पिता को ही सुनाई देती,जो छोटे शहर , गांव कस्बों से अपने बच्चे को बिना उससे पूछे भेंजे हैं कि 'आख़िर वो करना क्या चाहता ?'
क्योंकि, पड़ोस के उनके मित्र का बच्चा वहीं जाकर तैयारी कर रहा है...और उनका बच्चा न जाये तो समाज में वे अपना मुंह कैसे किसी को दिखाएंगे, उनकी साख पर बट्टा न लग जायेगा !
और न ही फैक्ट्री के मैन्युफैक्चरर को जिन्हें बच्चें को मशीन बनाने के लिए सौंपा गया है....क्योंकि, उन मैन्युफैक्चरर में भी आपसी प्रतिस्पर्धा है कि किस फैक्ट्री का बच्चा कितना बेहतर मशीन बना है...
शिक्षा से जनित बाज़ार तक भी यह चीख नहीं सुनी जाती क्योंकि वो भी अपने व्यापार में व्यस्त होते हैं...भीड़ है...शोर है वहाँ....
''शोर में अक्सर अंतर्मन की चीख दब जाती है''...
और इस अकेलेपन में, हताशा में, वो बच्चा जो मशीन बन सकने में असमर्थ हो जाता, उसकी क्षमता जवाब दे देती तो,पंखे से खुद को लटकाकर इस दबाव से मुक्त होने का सफल या असफल प्रयास करता ...
वो इस दबाव से मुक्ति के लिए ये प्रयास न करें...इसलिए अब ये नया प्रयोग किया जा रहा है पंखे को जाली से घेरने का !
यह तस्वीर शिक्षा के बाज़ारवाद से उत्पन्न महत्वाकांक्षा से जनित मानसिक दवाब से पीड़ित बच्चों के सपनों के परों को कतरने का परिणाम है...
जाग जाइए.... वरना प्रतिस्पर्धा की इस अंधी दौड़ में बहुत कुछ पाकर भी सब कुछ खो दीजियेगा !
#kotafactory
Prabhakar Kumar Machvey की कलम से...
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