ये हार बहुत कुछ सिखाती है !

दो बार के विश्व विजेता वेस्टइंडीज विश्व कप से बाहर !

ज़िन्दगी हो या खेल यहां सिर्फ एक ही चीज़ निश्चित है,कि यहां कुछ भी निश्चित नहीं...
                                जीवन में निश्चितता,स्थायित्व के पीछे भाग रही युवा पीढ़ी को इस घटना से सीखना चाहिए कि आप कभी भी अर्श से फ़र्श  पर गिर सकते या फर्श से अर्श पर पहुंच सकते...

 दो बार की विश्व विजेता टीम भी आयरलैंड जैसी छोटी टीम से हारकर विश्व कप प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाती है...और हम यहां भविष्य की कोरी कल्पना में अपने आज को गवां रहे...स्थायित्व की चाह की वजह से ही यहां कई प्रतिभाएं खो जाती है...आज जो खुद को सिकन्दर मान रहे उन्हें इस अहम से बचना चाहिए और जो हताश हैं कि अब कुछ नहीं हो सकता उन्हें बस लगे रहना चाहिए...क्योंकि

 जीवन मे कुछ भी स्थायी नहीं...

न खुशी, न ग़म ...न प्रसिद्धि न गुमनामी...

तो आख़िर क्या है जीवन ?

जीवन एक गूढ़ रहस्य है, जीवन सत्य है...जीवन अद्भुत है, विलक्षण है...जीवन सृष्टि और स्रष्टा का एकाकार होना है...

तो क्या हो जीवन के प्रति हमारा नज़रिया ?

मुझे लगता अपनी नश्वरता के प्रति, जीवन के अनिश्चितता के प्रति पूरी तरह से जागरूक होकर ही हम जीवन का असली आनंद ले सकते हैं... हमें दूसरे की नकल करते हुए वो नहीं करना चाहिए जो दूसरे कर रहे बल्कि हमें वो करना चाहिए जो हमारे लिए जरूरी है...

क्योंकि मरना तय है...कब मरेंगे पता नहीं ?
तो जीना कैसे चाहते ? यह हमारे हाथ में है....

जीवन रूपी परीक्षा के सबसे अहम पहलू यही है कि इस परीक्षा में हर किसी के प्रश्न अलग- अलग होते...
सफलता का कोई निश्चित पैमाना नहीं और न ही यह कोई मंजिल है...यह तो एक सफ़रनामा है...

सच में, ये हार बहुत कुछ सिखाती है....

Prabhakar Kumar Machvey  की कलम से...

#हारसिखातीहै

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