फ़र्श से अर्श तक का सफ़र
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की जीवन्तता का इससे बेहतरीन उदाहरण और कुछ नहीं हो सकता...जब समाज के सबसे निचले तबके से आने वाली एक महिला देश के शीर्ष पर पहुंचती है...
लिंग व जाति के आधार पर भेदभाव करने के झूठे आरोप लगाकर जिस पाश्चात्य संस्कृति ने हम भारतीयों को असभ्य कहने की जहमत उठायी थी,जिन्होंने अपने शोषण को हमें सभ्य बनाने के प्रयास के नाम दिए थे,उनके गालों पर तमाचा है यह...
भगवान जगन्नाथ की साधिका व राघवेंद्र राम सरकार को ध्येय-पथ सुझाने वाली हमारी माँ शबरी की वंशबेलि, आदरणीय श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का देश के शीर्ष पद पर सुशोभित होना न सिर्फ भारतीय लोकतंत्र बल्कि हमारी सनातन संस्कृति के जीत का उत्सव है...और समाज के सबसे निचले स्तर के व्यक्ति को एक भरोसा कि लोकतंत्र में फ़र्श से अर्श तक का सफ़र किया जा सकता है...
भारतीय गणतंत्र के राज-उपवन को यह पवित्र वनफूल मंगलकारी हो और पूरे विश्व में इसकी सुवास फैलती रहे...
मुझे उम्मीद है देश की नवनिर्वाचित राष्ट्रपति देश की राजनीतिक पटल पर बिखरे और संकुचित विपक्ष की वजह से सत्ता के निरंकुश और असंवेदनशील होने की संभावना को लगाम लगाने में जरूर कामयाब होंगी !
प्रभाकर कुमार 'माचवे' की कलम से...
#PresidentOfIndia
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