धर्म के नाम पर नफ़रत फैलाने वालों इनसे सीखो....

मेरे देशप्रेमियों आपस में प्रेम करो..मेरे देशप्रेमियों...

पटना के राजाबाजार से जब ये अर्थी निकली तो आस-पास के लोग देखकर अपनी दांतों तले उंगलियां दबा लिए... 75 वर्षीय रामदेव जी का शव मोहम्मद रिजवान, अरमान, राशिद और इजहार के कंधों पर था। ये चारों "राम नाम सत्य है" बोलते हुए शव को गंगा घाट तक ले गए और हिंदू रीति से रामदेव जी का अंतिम संस्कार किया...रामदेव जी इनके दुकान पर पिछले 25 वर्षों से काम करते थे...

इस घटना ने साबित कर दिया कि आज भी इंसानियत जिंदा है...कुछ सरफिरों की वजह से हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब कभी खत्म नहीं हो सकती....

उदयपुर,अमरावती की घटनाओं ने भीतर ऐसा ज़हर घोला है कि नफ़रत जीतने लगी थी,इंसानियत हारने लगी थी...मगर,इस ख़बर ने मुझे फिर से एक भरोसा दिया है कि हिंदुस्तान जिंदाबाद था,जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा...

जीवन में सबसे मुश्किल दौर से व्यक्ति तब गुज़रता है जब उसका भरोसा टूटने लगता है...इस ख़बर ने मेरे जैसे कितनों के टूटते भरोसे को एक उम्मीद तो जरूर दिया है...

प्रभाकर कुमार 'माचवे'  की कलम से...

#उम्मीद #इंसानियत

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