दिल्ली फैसले से बिहार को नई राह
दिल्ली मामले के सुप्रीम के फैसले पर बिहार को उम्मीद दिल्ली में 'आम आदमी पार्टी'और 'उपराज्यपाल' के मध्य का खींचतान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ अपने-अपने अधिकार सीमा में वापस आना,किसी पार्टी के जीत से कहीं बढ़कर लोकतंत्र की जीत है।
सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 239AA को स्पष्ट करते हुए कहा कि दिल्ली को कभी भी पूर्ण राज्य का दर्जा नही दिया जा सकता इसलिए केजरीवाल इसकी वकालत छोड़ के उपराज्यपाल के साथ सामंजस्य बिठाकर दिल्ली की जनता की मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति पर ध्यान केंद्रित करें,वहीं कोर्ट ने उपराज्यपाल को निर्देशित किया है कि वो मंत्रिमंडल के द्वारा लिए फैसले को स्वीकार करने को बाध्य हैं,किसी विशेष मतभेद की स्थिति में राष्ट्रपति का फैसला सर्वमान्य होगा।उपराज्यपाल के पास भूमि,पुलिस और कानून व्यवस्थता की जिम्मेवारी है।
बिहारी होने के नाते मैं इस फैसले में बिहार के भविष्य निर्धारण की एक नई पहल की गुंजाइश को देख पा रहा हूँ,क्यों न बिहार सरकार भी 'विशेष राज्य के दर्जा'की मांग न्यायपालिका के माध्यम से अपनी अधिकार सीमा के बारे में अवगत हो जाये,इस मुद्दे पर जो सियासत अपनी रोटियां सेक रहा उससे बिहार की जनता के द्वंद का समाधान हो जाएगा औऱ ये भी स्पष्ट हो जाएगा कि संवैधानिक व्यवहार में क्या हमें विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त भी हो सकता है या नहीं..."क्यों न एक पहल के तौर पर न्यापालिका के चौखट पर बिहार भी अपनी हाज़री लगाए"
प्रभाकर कुमार 'माचवे'
अलीगंज,जमुई,बिहार
सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 239AA को स्पष्ट करते हुए कहा कि दिल्ली को कभी भी पूर्ण राज्य का दर्जा नही दिया जा सकता इसलिए केजरीवाल इसकी वकालत छोड़ के उपराज्यपाल के साथ सामंजस्य बिठाकर दिल्ली की जनता की मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति पर ध्यान केंद्रित करें,वहीं कोर्ट ने उपराज्यपाल को निर्देशित किया है कि वो मंत्रिमंडल के द्वारा लिए फैसले को स्वीकार करने को बाध्य हैं,किसी विशेष मतभेद की स्थिति में राष्ट्रपति का फैसला सर्वमान्य होगा।उपराज्यपाल के पास भूमि,पुलिस और कानून व्यवस्थता की जिम्मेवारी है।
बिहारी होने के नाते मैं इस फैसले में बिहार के भविष्य निर्धारण की एक नई पहल की गुंजाइश को देख पा रहा हूँ,क्यों न बिहार सरकार भी 'विशेष राज्य के दर्जा'की मांग न्यायपालिका के माध्यम से अपनी अधिकार सीमा के बारे में अवगत हो जाये,इस मुद्दे पर जो सियासत अपनी रोटियां सेक रहा उससे बिहार की जनता के द्वंद का समाधान हो जाएगा औऱ ये भी स्पष्ट हो जाएगा कि संवैधानिक व्यवहार में क्या हमें विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त भी हो सकता है या नहीं..."क्यों न एक पहल के तौर पर न्यापालिका के चौखट पर बिहार भी अपनी हाज़री लगाए"
प्रभाकर कुमार 'माचवे'
अलीगंज,जमुई,बिहार
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