स्वर्ग की तलाश

                    'स्वर्ग की तलाश'
दिल्ली की बुराड़ी में एक परिवार के 11 लोगों की सन्देहास्पद मौत ने "जीवन की अनिश्चितता और उसके प्रति मानवीय असजगता" को रेखांकित कर रही।
            'मोक्ष' की प्राप्ति की चाहत, पहली नज़र में सामूहिक खुदकुशी से यही तथ्य सामने आ रहा है।अगर यह सत्य है, तो आज यह समझने का वक़्त आ गया है कि खुद को विवेकवान कहने वाला यह इंसान कहीं भीतर से खोखला तो नहीं...
     'स्वर्ग और नरक' कोई भौगोलिक स्थान के नाम नही हैं,यह हमारे भीतर हैं...हम खुद को जैसा बनाते हैं बस उसकी परिणिति है...
        आज स्वर्ग की लालसा इसलिए तीव्र हो गयी है,क्योंकि हम खुद के भीतर नरक का निर्माण कर रहे और अन्यत्र किसी दूसरे लोक में स्वर्ग की परिकल्पना कर रहें...
      'स्वर्ग हमारे भीतर है',बस...स्वच्छंद और सजग होकर जीवन का भरपूर आनंद लेकर हम खुद के भीतर स्वर्ग का निर्माण कर सकते हैं...
             प्रभाकर कुमार 'माचवे'
             अलीगंज,जमुई,बिहार

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