अविवाहित मित्रों के नाम खुले ख़त...
मेरे प्यारे अविवाहित मित्रों,
स्नेहपूर्ण अभिनंदन !
सोचा एक ख़त लिखूं आपको...यह पत्र उन सभी अविवाहित मित्रों को समर्पित जिनको अपने लिए किसी जीवन संगिनी की तलाश है...
जीवन संगिनी...हमसफ़र... जिसके साथ ज़िन्दगी के सुख- दुःख बाँटें जाए, जिस अजनबी के साथ जीवन को और बेहतर तरीके से जीने के सुनहरे सपने आप बुन रहे हैं...उनका चयन बहुत ही सावधानीपूर्वक करना निहायत ही जरूरी है...जी,मैं चयन की बात कर रहा हूँ क्योंकि विवाह निश्चित तौर पर आपका चुनाव है...
तो सवाल उठता है,कि आख़िर कैसी हो आपकी जीवनसंगिनी ? क्या हो उसके मौलिक गुण ?
देखिये, भाईयों... विवाह करने का यदि आपने फैसला कर ही लिया है तो मेरा विनम्र आग्रह होगा कि आपको सबसे पहले खुद से ही यह सवाल करना चाहिए कि "आख़िर आपको क्यों करना है विवाह ? "
थोड़ा अज़ीब लग रहा होगा आपको...क्यों करना है ? ये भी कोई सवाल है...सब करते हैं...कोई सोचता थोड़ी, कि क्यों करना है !
जी, यही तो विडम्बना है कि लोग एक छोटी सी खर्च के पहले सौ मर्तबा सोचते कि आख़िर क्यों ? , और आप अपने बचे जीवन की डोर ही किसी और को सौंपने की तैयारी कर रहे और वो भी बिना ये सोचे कि आख़िर क्यों ?
आपको विवाह के बाद होने वाले परिवर्तन का शायद अंदाज़ा नहीं है...मुझे तो कोई निजी अनुभव नहीं है लेकिन अपने अध्ययन के अनुभव के आधार पर कह सकता कि आप यक़ीनन वो तो नहीं रहेंगे जो अभी आप हैं...और आप ही नहीं विवाह आपसे जुड़े कई लोगों की ज़िंदगी में बहुत बड़ा परिवर्तन करता है...इतने बड़े परिवर्तन से पहले क्या आपको नहीं लगता कि आपको एक बार सोचना चाहिए कि "आख़िर क्यों करना है आपको विवाह ?"
आपका हितैषी
प्रभाकर कुमार 'माचवे'
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