गांधी जी का चौथा बन्दर !
गांधी जी का चौथा बंदर !
नमस्ते दोस्तो ! आज मैं अपने आलेख के साथ आपके साथ जुड़ा हूँ...शीषर्क और तस्वीर देखकर शायद कुछ न कुछ आपने अनुमान लगा ही लिया होगा...जी हाँ.. आप बिल्कुल सही सोच रहे, मैं 21वीं सदी के सबसे अनोखे बन्दर.. "गांधी जी का चौथा बन्दर" की बात कर रहा...
बड़ा अनोखा है ये बन्दर...और सबसे खास बात, ये आपको आज कल हर चौक,चौराहे पर, बस के इंतेज़ार में खड़े,ट्रैन के इंतेज़ार में बैठे...कभी-कभी तो खाते वक़्त, टीवी देखते वक़्त...क्लास रूम में पीछे की सीट पर बैठे बच्चों के हाथों में...कईयों को तो अब शौच करते वक़्त भी ऐसी स्थिति में पाया गया है...
जी, हां... इस छोटी सी मायावी मशीन ने हमें सच में गांधी जी का चौथा बन्दर बना दिया है...इस छः इंच के मायावी यंत्र ने मनुष्य को दुनिया से कितना जोड़ा है पता नहीं...मगर, इसकी वजह से मनुष्य खुद से तो कोसो दूर हो गया है...अपनों से कोसो दूर हो गया है...
अब वो बचपन की खिलखिलाती हँसी... छोटी उम्र में किताबों से दिल्लगी...परिवार के साथ की वो गप्पें...दादी नानी की कहानियां...सब कुछ को बड़े ही आहिस्ते आहिस्ते...इस मायावी यंत्र ने छीन लिया है...
हमें मशीन का प्रयोग करना चाहिए, आज मोबाइल फोन बुनियादी जरूरत में शामिल हो गयी है...किन्तु, मशीन हमारे जीवन को और सार्थक और बेहतर बनाने के लिए है न कि हम मशीन के ही गुलाम हो जाएं...इस मायावी यंत्र ने मनुष्य को ऐसा जकड़ा है कि इससे निकल पाना सम्भव नहीं जान पड़ रहा....
Prabhakar Kumar Machvey की कलम से...
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