आतातायियों के कृत्यों पर तमाचा है यह प्रकाश पर्व
जिस लालकिले से जुल्म का साम्राज्य फैलाने वाले औरंगजेब की सलामती के लिए अज़ान गुंजा करते थे,जिस किले पर एक समय मुगलिया सल्तनत का झंडा फहरता रहता था,जिसे देखकर देश की आम जनता के आंखों से खून के आंसू निकलते थे...
जिस औरंगजेब की कुरुरता का कभी गवाह बनी,लालकिला की ये दीवारें जालिमों के बेतहाशा अट्हास के गूंज में आम लोगों की चीखों को दफ़न कर देती थी...
जिस किले से शासन करते हुए,औरंगजेब ने सिखों के नौवें गुरु तेगबहादुर को इस्लाम न कबूलने पर उनके शीश काटने का मुगलिया फरमान सुनाया था...
आज वही लालकिला..जी,हाँ.. वही लालकिला... गुरु तेगबहादुर की 400वीं जयंती प्रकाश पर्व पर इस तरह सज-धज के उन आतातायियों का उपहास उड़ाएगा,ये मैंने कल्पना भी नहीं की थी...
मैं अपने आप को धन्य मानता हूँ,जो मेरा जन्म इस बलिदानी धरा पर हुआ...जहां हँसते-हँसते अपने चार बेटो को बलिदान करने वाला बाप,खुद की जान दे दी...मगर अपने धर्म को नहीं छोड़े...
प्रभाकर कुमार 'माचवे' की कलम से...
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