इसी रूप पर मोहित हो गयी होंगी जानकी !
जिनका जीवन दुःखों से भरा हो, फिर भी चेहरे पर हो एक पुलकित मुस्कान वही है राम....
राम...यह किसी धर्म विशेष के भगवान का नाम नहीं,अपितु यह एक इंसान का भगवान बनना है...
AI के द्वारा निर्मित इस चित्र में राम की सौम्यता,उनके ललाट की तेजस्विता और आंखों की दिव्यता साफ परिलक्षित हो रही है...काले -भूरे घुंघराले घने लंबे बाल, तीखी भौं,खड़ी नाकें, सुंदर ग्रीवा... चेहरे पर अलौलिक दिव्य सौंदर्य...
यक़ीनन, इसी दिव्य अलौकिकता पर मोहित हो गयी होंगी जानकी...वाटिका में जब पहली बार निगाहें टकराई होंगी...तो ठिठक सी गयी होंगी जनकपुत्री..और पहली नज़र में ही हो गए होंगे 'सिया के राम'...
राजभवन की भरी सभा में भी चुपके से अंगूठे के नगीने पर जिसके प्रतिबिम्ब के दीदार से मन हर्षित हो उठता हो, कुछ ऐसे ही हैं राम....
घट-घट में हैं राम...कण-कण में हैं राम
संयम से सिद्धि प्राप्ति के मार्ग हैं राम ....
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