ग्लोबल दीवाली
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत न सिर्फ आर्थिक संबलता प्रदान कर रही है, बल्कि साथ ही साथ पूरा विश्व भारत के सांस्कृतिक मूल्यों को बड़ी सहजता से अपना रहा है... उसी कड़ी में भारत के दीपोत्सव का पर्व 'ग्लोबल दीवाली' बनता जा रहा है.
भारतवंशियों का पूरे विश्व में बढ़ता प्रभाव दीवाली को विश्व अर्थव्यवस्था की गतिशीलता को बढ़ाने वाला पर्व बना दिया है। बराक ओबामा के द्वारा 2009 से व्हाइट हाउस में दीवाली मनाने की परंपरा की जो शुरुआत हुई, वो आज भी अनवरत जारी है। अमेरिका में विशेषकर पेंसिलवेनिया और न्यूयार्क जैसे राज्यों में धूम-धाम से दीवाली मनाई जाती है। अमेरिका की तरह ब्रिटेन में भी ऋषि सुनक ने प्रधानमंत्री निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट में दीवाली मनाने की जिस परंपरा की शुरुआत की, वो लेबर प्रधानमंत्री सर किएर स्टार्मर ने भी जारी रखा है। संयुक्त अरब अमीरात में एक बड़ी आबादी भारतवंशियों की है, जहाँ दुबई की प्रसिद्ध इमारत बुर्ज खलीफा और पाम जुमैरा द्वीप पर आतिशबाजी की अनुपम छटा के साथ दीवाली का उत्सव मनाया जाता है..
दक्षिण अफ्रीका में जोहांसबर्ग व आस्ट्रेलिया के डरबन, सिडनी क्रिकेट मैदान की अनोखी दीवाली विश्व प्रसिद्ध है। मलेशिया में दीवाली पर आतिशबाजी नहीं की जाती है, जिस कारण इसे 'ग्रीन दीवाली' कहा जाता है थाइलैंड में केले के पत्तों का दोना बनाकर उस पर मोमबत्ती जलाकर पानी में बहाया जाता है।
दीवाली का यह उत्सव कारोबार की गति को क्रिसमस तक बाजार बढ़ा देता है और पूरे क्रिसमस तक बाजार की रौनक बनी रहती है। आज विश्व बाजार में भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरत का विशेष ख्याल रखा जा रहा है, क्योंकि भारत की तीव्र विकास दर और भारतीय मध्य वर्ग का बढ़ता जीवन स्तर उसके उपभोग की क्षमता का विकास कर रहा है, सिर्फ दीवाली में ही भारत में करीब 5 लाख करोड़ का कारोबार हो रहा है जो विश्व बाजार के लिए एक सुनहरा बूस्ट अप बनता है।
दीवाली का यह ग्लोबल स्वरूप भारतीय संस्कृति की विश्व संस्कृति को दिया गया अनुपम भेंट है... नए भारत के सशक्तिकरण में यह सांस्कृतिक नेतृत्व की भूमिकाभारत के विश्व मित्र के रूप में अपनी भागीदारी को सुनिश्चित कर रहा है...
लोकल से ग्लोबल बनते इस दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं !
प्रभाकर कुमार 'माचवे'
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