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छठ : लोक आस्था का महापर्व

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छठ... यह दो अक्षरों का शब्द अपने भीतर एक अनूठी संस्कृति को समेटे हम बिहारियों के लिए एक एहसास है... यह. महापर्व बहुत ही खास है, क्योकिं यह पर्व दूर गए अपनों को लाता पास है। परदेश गए वो अपने इसी महापर्व में वापस अपने घर लौटते हैं और आस्था के जल में डुबकी लगाकर इन चार दिनों तक चलने वाले महापर्व में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। इस महापर्व की शुरुआत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को नहाय-खाय के साथ शुरू होती है। इस दिन प्रातःकाल पूरे घर की साफ-सफाई के बाद स्नान-ध्यान करके  पूरी शुचिता के साथ कदुआ-भात पकाया जाता है और प्रसाद स्वरूप पूरा कुटुंब उसका सेवन करता है। पूरे घर में अलौकिक - दिव्यता का माहौल निर्मित होता है, जिसमें शारदा सिंहा की मधुर आवाज़ में छठ गीत  की ध्वनि पूरे वातावरण को छठमयी कर देती है।   इस छठ से जुड़ी अनेक पौराणिक कहानियाँ हैं, जिसमें सबसे प्रचलित कथा के अनुसार त्रेतायुग में माँ सीता के द्वारा बिहार के मुंगेर में गंगा तट पर की गई उनकी -सूर्य उपासना है जहां आज भी उनके चरण चिह्न की मौजूदगी की मान्यता है। वहीं द्वापर युग में पांडवो के विज...

ग्लोबल दीवाली

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वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत न सिर्फ आर्थिक संबलता प्रदान कर रही है, बल्कि साथ ही साथ पूरा विश्व भारत के सांस्कृतिक मूल्यों को बड़ी सहजता से अपना रहा है... उसी कड़ी में भारत के दीपोत्सव का पर्व 'ग्लोबल दीवाली' बनता जा रहा है. भारतवंशियों का पूरे विश्व में बढ़ता प्रभाव दीवाली को विश्व अर्थव्यवस्था की गतिशीलता को बढ़ाने वाला पर्व बना दिया है। बराक ओबामा के द्वारा 2009 से व्हाइट हाउस में दीवाली मनाने की परंपरा की जो शुरुआत हुई, वो आज भी अनवरत जारी है। अमेरिका में विशेषकर पेंसिलवेनिया  और न्यूयार्क जैसे राज्यों  में धूम-धाम से दीवाली मनाई  जाती है। अमेरिका की तरह ब्रिटेन में भी ऋषि सुनक ने प्रधानमंत्री निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट में दीवाली मनाने की जिस परंपरा की शुरुआत की, वो लेबर प्रधानमंत्री सर किएर स्टार्मर ने भी जारी रखा है। संयुक्त अरब अमीरात में एक बड़ी आबादी भारतवंशियों की है, जहाँ दुबई की प्रसिद्ध इमारत बुर्ज खलीफा और पाम जुमैरा द्वीप पर आतिशबाजी की अनुपम छटा के साथ दीवाली का उत्सव मनाया जाता है.. दक्षिण अफ्रीका में जोहांसबर्ग व आस्ट्रेलिया के डरबन, सिड...

प्रभाकर के सवाल जमुई लोजपा सांसद उम्मीदवार के जवाब...

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प्रभाकर के सवाल, लोजपा जमुई सांसद उम्मीदवार अरुण भारती के जवाब... प्रभाकर का पहला सवाल - क्षेत्र के युवाओं के रोजगार के लिए आपके पास क्या विजन है ? अरुण भारती जी का जवाब - युवाओ को सर्वप्रथम अपने स्किल पर काम करना होगा,अपने शिक्षण कार्यक्रम के साथ-साथ स्किल सीखना जरूरी है...सरकारी नौकरी कभी भी रोजगार की मांग को पूरा नहीं कर सकती...रोजगार परक शिक्षा समय की मांग है... दूसरा सवाल - हमारा क्षेत्र जल की कमी के कारण सुखाड़ से ग्रसित है,गर्मी के दिनों में पेयजल संकट की समस्या भी बढ़ती जा रही...आपके पास क्या समाधान है ? जवाब - हमें वर्षाजल संरक्षण पर जोर देना है,साथ ही लोगो को जागरूक कर जल की बर्बादी को रोकना है... तीसरा सवाल - क्षेत्र में कृषिजनित उद्योग व अन्य उद्योग के विकास के लिए एक बेहतर सम्भावना है,आप इसे कैसे शुरू करेंगे ? जवाब - मैं राजनीति से पहले उद्योग का संचालन कर रहा था,मुझे इसका बेहतर अनुभव है और मुझे लगता है कि एक सांसद के रूप में मैं क्षेत्र में उद्योग का विस्तार कर सकता हूँ... चौथा प्रश्न - लोग आपको बाहरी मान रहे, लोगो को भय है कि चुनाव जीतने के बाद आप दर्शन ...

आज का प्यार बस व्यापार है...

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आज का प्यार एक व्यापार है...सोचो,समझो,विचारों...उतर जाएगा यह बस एक खुमार है... दृश्य में बॉलीवुड की दो फिल्में...एक 'मेरे शादी में जरूर आना'  जिसकी अभिनेत्री राज्य लोक सेवा आयोग के रिजल्ट होते ही एक क्लर्क को छोड़कर ब्याह से पहले भाग गई...और वो लड़का इसके इन्तेक़ाम में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करके डीएम बन जाता है...और उसके डीएम बनते ही उस लड़की में उसके प्रति फिर से प्यार उमड़ पड़ता है... जनाब, यह प्यार नहीं बस व्यापार है... दूसरी फिल्म है, '12th fail'...अद्भुत पटकथा,सच्चे घटना पर फिल्माई गयी कहानी...एक लड़की एक लड़के के बिना कोचिंग के प्री निकालने के जज्बे से रोमांचित थी,उससे मिलने वो पुस्तकालय जाती है,जहां वो लड़का किसी एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की किताब को उलट पलट रहा था...लड़की उसे एरोनॉटिकल इंजीनियर समझ बैठती है और अपने जीवन के भविष्य को उस होनहार और सुयोग्य लड़के से जोड़कर देखने लगती है...लेकिन,जैसे ही इस झूठ का पर्दाफाश होता है...एक झटके से किनारे ले लेती है...और फिर जब उस लड़के में आग देखती है,उसमें उसके प्रति का पागलपन देखती है,वो जिद देखती है...तो फिर upsc...

श्रद्धा जैसा साथ चाहिए तो मनोज जैसी आग भी हो...

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12th fail फ़िल्म ने एक बार फिर से हर प्रेमी को एक आदर्श प्रेमिका का स्वप्न दिखा दिया है...हर लड़का अपनी प्रेमिका के रूप श्रद्धा जैसी साथ निभाने वाली साथी की तलाश में लग गया है... मैं व्यक्तिगत तौर पर इस फ़िल्म को दूसरे नज़रिए से देख रहा...हो सकता है,मेरे इस नजरिए से मेरे पुरुष मित्र मंडली मुझसे खफ़ा हो जाये...लेकिन, सच को बेपरवाही से कहने में मुझे कोई संकोच नहीं...कोई भय नहीं... मेरा स्पष्ट मानना है कि यदि तुम्हारे भीतर मनोज जैसी आग है,तभी तुम श्रद्धा जैसा साथ पाने के हकदार हो...क्योंकि,प्रेम वही पाता जो हकदार हो... यदि खुद के लिए कोई सपना देखे हो...तो तुम्हारे भीतर भी वही मनोज जैसा धैर्य,लगनशीलता और जिद होनी चाहिए...फ़िल्म में सिर्फ श्रद्धा की आदर्शता देखने वाले को ये नहीं भूलना चाहिए कि वो वही लड़की थी जिसके घर पहुंचने पर उसे बिना पानी पिएं लौटने के लिए कहा गया था...मनोज एक असफल प्रेमी की तरह दोस्तों के बीच आकर करुण क्रंदन नहीं कर रहा था, उसने अपने आंसू पोछें और अपनी सपने को सच करने में लग गया.... श्रद्धा जैसी लड़कियां आपके भीतर के मनोज जैसे आग को देखकर अपना सब कुछ समर्पित कर सकत...