युवा शक्ति ही रचेगा भारत का भविष्य

भारत जो पूरे विश्व पटल पर खुद को विश्व मित्र के रूप में प्रस्तुत कर रहा,उसकी शक्ति व क्षमता का एक ज्योति पुंज उसकी युवा शक्ति है। भारत अभी जनसंख्या वितरण के स्वर्णिम काल से गुज़र रहा जब देश की 65% आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है..यह संयोग भारत की विकास प्रक्रिया में अहम योगदान दे रही..

लेकिन सवाल उठता है, यदि इस युवा शक्ति को सही मार्गदर्शन और प्रेरणा न मिला तो यह तबाही का रूप भी ले सकती है..अतः,युवाओं को एक कल्याणकारी शक्ति के रूप में निर्मित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने दो पूरक तरीके से प्रयास करने का सुझाव दिया है। जिसमे से पहला तरीका है युवाओं को एक जागरूक मानवीय शक्ति के रूप में निखारना और दूसरा उन्हें सक्रिय तत्व के रूप में विकसित करना..
       यह दोनों कार्य का संपादन शिक्षण संस्थानों के माध्यम से ही हो सकता है..शिक्षा ही इस क्रांति की मूल होगी..2047 तक विकसित भारत का सपना युवाओं की कार्य क्षमता से ही सम्भव है..युवाओं को जागरूक व सक्रिय करने के लिए कई संस्थान विकास अध्ययन से जुड़े विद्वानों,नीति निर्माताओं और प्रशासकों के मध्य विचार विमर्श करवाकर कई सारी कार्य योजना बनाने का प्रयास कर रही है।

किसी राष्ट्र की प्रगति उसके युवाओं के चेतना में निहित दर्शन पर टिकी होती है। चीन की प्रगति का मूल आधार कन्फ्यूशियस के दर्शन को वहां के युवाओं के द्वारा आत्मनिहित का ही प्रतिफल है।
उसी प्रकार भारतीय दर्शन परम्परा में अनेक ऐसे तत्व है जिन्हें आत्म निहित कर भारतीय युवा शक्ति भी संकल्पित होकर विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकती है।

भारतीय पारम्परिक ऊर्जस्विता का आधुनिक ज्ञान,विज्ञान एवं तकनीकी के साथ मणिकांचन संयोग से ही विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है...जिसमें एक बड़ी भूमिका उच्च शिक्षा संस्थानों की रहेगी...
33.34 करोड़ की युवा शक्ति ही आज पूरे विश्व पटल पर भारत को विश्व मित्र के रूप में अपनी प्रेरणा,संस्कार,प्रतिबद्धता,कर्तव्य,ज्ञान,विज्ञान,तकनीकी और आधुनिकता के द्वाराएक सच्चे माननीय पूंजी का निर्माण कर , हम उपयोगी सिद्ध हो सकते है..शक्ति की मौलिक कल्पना कर ही हम विकसित भारत का आधार रख सकते...

प्रभाकर कुमार,अलीगंज, जमुई, बिहार

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