UPSC में हिंदी माध्यम से सफल होने के 10 सूत्र...


भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में हिंदी माध्यम के चयन की संख्या क्यों गिर रही है,ये हमने पिछले आलेख में भलीं भांति जानने का प्रयास किया, हर छोटी सी छोटी बातों पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया रखने का हरसम्भव प्रयास किया है।

इस आलेख में हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि आख़िर हिंदी माध्यम से चयन के लिए आख़िर करना क्या चाहिए?.यह हो भी सकता है या फिर सिर्फ ऊंट के मुंह में जीरा के फोरन के समान होगा..कोचिंग संस्थान वाले आपका मनोबल ऐसे भी सातवें आसमान पर पहुंचा कर  फीस की मोटी रकम वसूल तो रह ही रहें...

कुछ बिंदुवार प्रयास जिनसे हिंदी माध्यम से सफलता मिल सकती..

1. हिंदी के साथ-साथ सामान्य अंग्रेजी की भी समझ हो-

प्रश्नों को सही तरीके से समझने के लिए,नए वैज्ञानिक शब्दावलियों के उपयुक्त हिंदी शब्द न मिलने की कमी को विद्यार्थी को ही दूर करना होगा...एक हिंदी माध्यम के विद्यार्थी के पास अंग्रेजी की सामान्य समझ होना अनिवार्य है,ऐसे भी, सामान्य अंग्रेजी की परीक्षा की तैयारी तो करनी है ही तो फिर क्यों न अंग्रेजी को थोड़े अच्छे तरीके से ही पढ़ लिया जाए जिससे एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में आप देश के किसी भी क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी सम्प्रेषण के स्तर पर सहज हों....

2. हिंदी पर अच्छी पकड़-

 हिंदी माध्यम के अधिकांश विद्यार्थी की वर्तनी अशुद्धता के साथ- साथ व्याकरणिक अशुद्धि का भी होना आम बात है और तो और अचरज इस बात की है,विद्यार्थी यहां तक कहते हुए पाए जाते हैं कि बस छोटी सी तो गलती है,पूरा शब्द तो समझ आ ही रहा...और इस बहाने के साथ वो इन गलतियों को नज़रंदाज़ करते रहते हैं।

हिंदी पर अच्छी पकड़ से मेरा मतलब साहित्यिक तत्सम शब्दों के भयावह प्रभाव जमाने से नहीं है,बल्कि एक सरल सहज स्नातक स्तरीय भाषा के प्रवाह से है ।

3. सुंदर व तेज लिखावट -

 परीक्षा की सफलता का सीधा सा पैमाना है सीमित समय मे अधिक से अधिक प्रश्नों को हल करने की क्षमता...

यदि प्रश्नों को शब्द संख्या के अनुसार देखा जाए तो 3 घण्टे में 20 अलग-अलग टॉपिक पर 250 के करीब शब्दों की लिखने की क्षमता,यानी कुल 5000 के करीब शब्द...

यदि हमें अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थी को हराकर उनसे आगे निकलना है तो निश्चित तौर पर हमारी हिंदी की लिखावट साफ,सुंदर और तेज होनी चाहिए।

4. हिंदी माध्यम के मूल किताबों को पढ़े न कि अंग्रेजी अनुवादित किताबों को-

परीक्षा में पूछे जा रहे प्रश्नों से ये तो स्पष्ट हो रहा है कि परीक्षक आपसे मौलिक समझ की मांग कर रहा है और जरूरी नहीं किसी भी प्रश्न का उत्तर किसी प्रामाणिक अंग्रेजी के पुस्तक के आधार पर हो। उत्तर पर अंक आपके उत्तर के साथ दिए तर्कों, आपके स्पष्ट समझ और भाषाई सौंदर्य के आधार पर मिलते न कि कोई ढर्रे पर दिए उत्तर के आधार पर...अतः,कोशिश करें कि हिंदी भाषा में लिखी मौलिक किताबों को ही पढ़े...

5. स्कूल व कॉलेज का दूसरा कोई विकल्प नहीं-

हिंदी माध्यम के अधिकांश विद्यार्थी स्कूल,कॉलेज की कमी को कोचिंग संस्थान से दूर करने की कोशिश कर रहे जो अत्यंत ही हास्यास्पद है। कोई भी कोचिंग संस्थान आपके स्कूल,कॉलेज की कमी को पूरा नहीं कर सकती।
कॉलेज के तीन-चार सालों में कई प्रकार की एक्स्ट्रा सर्कुलर एक्टिविटी के द्वारा आपके व्यक्तित्व का चहुमुंखी विकास होता है,आपके भीतर चुनौतियों से लड़ने की क्षमता स्वतः विकसित होती है।
अतः, एक अच्छा और स्तरीय कॉलेज में दाखिल होना विद्यार्थी की प्राथमिकता होनी चाहिए ।

6.कोचिंग सिर्फ मार्गदर्शन होता,वही सबकुछ नहीं...

अधिकांश हिंदी माध्यम के विद्यार्थी अपने आंखों में आईएएस बनने का सपना लेकर निकल पड़ते हैं मुखर्जी नगर की चकाचौंध भरी दुनिया में, और बड़े ठसक के साथ करवा लेते हैं तथाकथित बड़े नामी संस्थान में दाखिला...
और गधे की तरह लग जाते हैं तैयारी में 6 से 8 घण्टे की कोचिंग क्लास के साथ...कोचिंग से पढ़कर आने के बाद उनकी हालत क्लास नोट्स को फिर से उलटने पलटने तक की नहीं होती...
एक बार जो कोचिंग शिक्षक की बात सुन ली बस हो गया उनका आईएएस की तैयारी...

स्वाध्याय के नाम पर बस 4-5 दोस्तो के संग होती है बैठकबाज़ी,जिसमें दुनिया जहान की उलूल-जुलूल के मुद्दे पर घण्टों बीता दिए जाते हैं...

7. ढर्रे से हटकर भी कुछ पढ़े -

जिओ क्रांति के बाद यूट्यूब बाबा अब घर-घर पहुंच गए हैं,जिन पर बड़े आसानी से प्रतियोगिता के बाज़ार को बनाये रखने के लिए टॉपर के इंटरव्यू भारी मात्रा में उपलब्ध होते हैं..
 जिसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव ये  हुआ है कि ज्ञान का सामान्यीकरण हो गया है,हर कोई बस वही पढ़ रहा जो सब पढ़ रहे...बस आईएएस की तैयारी को भेड़-चाल बनाकर रख दिया गया है।

हमें यह स्वीकारना होगा कि टॉपर की ज़िंदगी, उनकी जीवनशैली, उनकी क्षमताएं-अक्षमताएं हमसे अलग होती है...
अब द्रविड़ सहवाग बनना चाहेगा तो वो सहवाग तो  कभी बनेगा नहीं और होगा ये कि वो द्रविड़ भी नहीं रह पाएगा...
यदि हिंदी माध्यम से सफल होना है तो इस भेड़ चाल से बचना होगा...कुछ अलग पढ़ना होगा,अलग तरीके से पढ़ना होगा...

8. अत्यधिक विद्वान होने से बचें-

हिंदी माध्यम के विद्यार्थी की एक बड़ी चुनौती यह है कि वो विषय के पारंगत विद्वान से पढ़ रहे और उनके प्रभाव में खुद को भी एक  विद्वान ही बनाना चाह रहे तो एक बात स्पष्ट कर दूं...upsc की तैयारी  विस्तृत तत्वों की सामान्य जानकारी है न कि सामान्य तत्वों की विस्तृत जानकारी...

विद्वान बनने के चक्कर में हिंदी माध्यम के अधिकांश अच्छे विद्यार्थी का चयन प्रारंभिक परीक्षा में ही नहीं होता है, जो हिंदी माध्यम से कम चयन का एक अहम कारण है।

9. Upsc की तैयारी को एक निश्चित समय दें-

हिंदी माध्यम के अधिकांश विद्यार्थी तकनीकी क्षेत्र के नहीं होते और साथ ही साथ निम्न मध्यम परिवार से होते..जिस कारण जीवन की अनिश्चितता से भयभीत होकर वो  upsc के साथ-साथ राज्य स्तरीय लोक सेवा परीक्षा और भी कई अन्य परीक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं।
मेरा मानना है,upsc और राज्य लोक सेवा परीक्षा की तैयारी बिल्कुल अलग - अलग रणनीति की मांग करता है।
यदि आपको भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी करनी है तो अपनी क्षमता को परखकर  पूरी तन्मयता से एक निश्चित समय के लिए सिर्फ इसकी ही तैयारी करें।

10. खुद पर और परीक्षा पध्दति पर पूरा भरोसा रखें-

हिंदी माध्यम के विद्यार्थी की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि उनका अपने ऑप्शनल विषय को लेकर,अपनी भाषा को लेकर और कभी कभी परीक्षा पध्दति पर से भरोसा उखड़ने लगता है।

हिंदी माध्यम के अधिकांश विद्यार्थी में दृढ़ संकल्प का अभाव साफ झलकता है और जब आप विश्व के सबसे कठिन इम्तिहान की तैयारी में लगे हैं और हर दो महीने में आपका परीक्षा प्रणाली और खुद पर से भरोसा उठने लगे तो आप स्वयं अंदाज़ा लगा सकते क्या ऐसे विद्यार्थी पूरी क्षमता से अपनी तैयारी कर पा रहे हैं ?.
और इस डर से बचने के लिए ये विद्यार्थी यूट्यूब वीडियो के किसी टॉपर के इंटरव्यू को देखने का सस्ता नशा करते हैं...मोटिवेशनल वीडियो को देखकर कुछ दिनों के लिए,कुछ घण्टों के लिए चने के झाड़ पर चढ़ जाते हैं और इन्हें लगने लगता है कि upsc के चक्रव्यूह को ये भेदकर ही दम लेंगे...मगर झूठे और अस्पष्ट उन्माद से ये चक्रव्यूह न कभी भेदा गया है न कभी भेदा जा सकता है...

मैंने 10  सूत्री एजेंडा के तहत हिंदी माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा में सफलता के मंत्र देने के प्रयास किये हैं...यदि आपकी दृष्टि में कोई अन्य सुझाव हो तो कमेंट में  जरूर बतावें...

प्रभाकर कुमार 'माचवे'...

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