ट्रेड वार और भारत
चीन और अमेरिका के मध्य चल रहे ट्रेड वार से पूरे विश्व की आर्थिक जगत में खलबली मच गई है,भारतीय शेयर बाजार भी इससे अनछुए नही हैं।खरीफ फसलों की MSP के निर्धारण में बढ़ोतरी से सत्ता पक्ष के प्रति विश्वास में बढ़ोतरी हुई है और अच्छे मानसून की उम्मीद की वजह से शेयर बाज़ार में मजबूती देखी जा रही,लेकिन इस ट्रेड वार की वजह से कच्चे तेल के भाव में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा सकती जिससे विकासशील देशों में मुद्रा स्फीर्ति होना तय है,मगर भारतीय अर्थव्यस्था में अभी हुए हालिया कुछ क्रांतिकारी बदलाव की वजह से इसके असर काफी कम पड़ेंगे।लोकसभा चुनाव नजदीक है जिस वजह से सत्ता पक्ष फूंक-फूंक के पांव रख रही है और चीन-अमेरिका के मध्य चल रहे 'ट्रेड वार' में खुद को लगभग उदासीन ही रखा है। कई अर्थशास्त्रियों का मानना है,'यह अमेरिका की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है',आज पूरे विश्व की मांगों की पूर्ति करने वाला एक मात्र देश चीन है जो इस व्यापारिक समर में जिस गति से अपना परचम लहरा रहा उससे 2030 तक वह दुनिया का सबसे ताकतवर देश बन जायेगा और इसी समीकरण को अपनी ओर साधने का प्रयत्न अमेरिका कर रहा। भारत...