सार्वजनिक परिवहन: समय की मांग
जीवन में लोग इतने सिमटते जा रहे हैं,धन से सामर्थ्य लोग लालसाओं में इतने घिर चुके हैं कि उन्हें अब सार्वजनिक जीवन के उल्लास में अजीब सी बेचैनी का आभास होने लगा है,पहले लोग शौक से सार्वजनिक परिवहन से यात्रा कर जीवन की समग्रता का लाभ लेना ,व्यवहारिक ज्ञान से खुद को लबरेज करना चाहते थे,मगर आज परिस्थिति बिल्कुल विपरीत हो चुकी है,अपने निजी वाहन से यात्रा करना सुविधा से ज्यादा झूठी शान की पेशगी का विषय बनता जा रहा..व्यक्ति खुद को लोगो की नज़र में स्थापित करने की चाह में इतना मशगूल हो गया है कि उसे सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने से होने वाले लाभ की जानकारी होने के बावजूद भी अपनी प्रतिष्ठा और शान की स्थापना करने की स्वार्थता को छिपाते हुए अपनी जरूरत का रोना रो रहा है,जो काफी हास्यस्पद है।अगर हम सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें तो ये हमे संसाधन की बचत के साथ -साथ व्यवहारिक ज्ञान से भी हमें रूबरू कराएगा,सड़क जाम की समस्या का मूल कारण निजी वाहन की अधिकता भी है,पर्यावरण प्रदूषण जैसी भयानक समस्या से भी हमें कुछ हद तक निजात मिल सकता है...अतः एक छोटी पहल की जाए,यथासम्भव सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें
प्रभाकर कुमार,अलीगंज,जमुई,बिहार
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