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मार्च, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

" आधुनिक युग की नारी "

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आधुनिक युग की नारी  "नारी ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है" और तकनीक के प्रयोग ने उन्हें जीवन के नए आयामों में खुद को कार्य करने का मौका दिया है...उस हर क्षेत्र में नारी ने साबित कर दिया है कि चाहे वह खेल का मैदान हो या फिर राजनीति का दंगल...  घर संभालना हो या फिर करना हो देश का प्रबंधन..  कलम से बदलनी हो अपनी किस्मत या फिर कूची से करना हो कोई नव सृजन... समुद्र की गहराई हो या फिर एवरेस्ट की ऊंचाई... जीवन के हर आयामों में जहां भी नारी को अवसर मिला उसने अपना विजय का परचम लहरा दिया ।   लेकिन, कई मामलों में व्यक्तिगत तौर पर मैं महसूस करता हूं कि सदियों से अवसर वंचना ( जो तात्कालिक परिस्थितियों में कई मामलों में स्वाभाविक भी था) की प्रतिक्रिया के रूप में आधुनिक युग की नारी ने अपने नारीत्व के मौलिक गुण सहजता को खो कर अपने मूल से दूर हो रही... जो ना सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक समस्या बन सकता। समाज से नारीत्व शक्ति का विलोपन कहीं अधिक क्रूर व कर्कश समाज बना सकता !  तो फिर समाधान क्या है ?  समाधान है संतुलन...  संतुलन का एक नया आयाम प्रस्तुत करना...

भविष्य में यह तकनीक कर देगा आपको बेरोजगार !

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भविष्य में बेरोजगारी की एक बड़ी समस्या की आहट ! इस कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नई तकनीक से भविष्य में कई लोगों के रोजगार पर हमला होने की सम्भावना है...विद्यार्थियों के भीतर आलसपन की चरमता आएगी, गूगल से तो उत्तर को तनिक ढूंढना भी पड़ता था,यहां तो पूरी तरह से बना बनाया उत्तर मिलता...वो भी आवश्यकता अनुसार शब्द सीमा में... शिक्षक,लेखक,कवि जैसे रचनात्मक कार्य भविष्य में अपनी उपयोगिता खो सकते हैं...मनुष्य की कल्पनाशक्ति की शक्ति भी कितनी प्रभावी होगी, कहना मुश्किल है... तकनीक के इस दौर में, जिस तेज गति से कार्यों का मशीनीकरण हो रहा है वो निश्चित तौर पर रोजगार परक शिक्षा की मांग को पैदा कर रहा...और यथाशीघ्र जमीनी स्तर पर ऐसा न किया गया तो बढ़ती युवा जनसंख्या पूरे भारत के लिए अभिशाप बन जाएंगी... जिस युवा शक्ति के बल पर हम विश्व गुरु बनने का सपना संजो रहे हैं, कहीं यही युवा शक्ति अनियंत्रित होकर महाप्रलय का कारण न बन जाये... भारत जैसे देश में अंधाधुंध तरीके से कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग निश्चित तौर पर खतरनाक है...देश की बड़ी आबादी आज भी गांवों में अपना जीवन व्यतीत कर रही और मशीनी रफ़्...

सुदूर देहात में जल रही शिक्षा की मशाल !

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अलीगंज प्रखंड के बालाडीह ग्राम में महिमा कांसेप्ट स्कूल के बच्चों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि " अब राजा का बेटा ही राजा नहीं बनेगा, बल्कि राजा वो बनेगा जो हक़दार है "... सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा में स्कूल के चार बच्चों ने जो सफ़लता का कीर्तिमान रचा है वो प्रमाण है कि प्रतिभा सिर्फ़ आलीशान विद्यालयों की ऊंची इमारतों में नहीं बल्कि सुदूर देहात में भी मौजूद है...बड़ी-बड़ी आलीशान इमारतों में अध्ययन करने वाले बच्चों के सामने अपनी प्रतिभा का सूर्य दमकाने में ये बच्चें कामयाब हुए हैं... सच में, शिक्षा ही वो शेरनी का दूध है,जो जितना पियेगा उतना जोर से दहाड़ेगा... ऐसे बच्चें न सिर्फ अपने गांव के लिए ही बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा हैं...इनके मार्गदर्शन में पूरी तन्मयता से लगे महिमा कांसेप्ट स्कूल के प्रिंसिपल,डायरेक्टर और सभी शिक्षकों को बहुत-बहुत बधाई.... यक़ीनन.... "सृष्टि और प्रलय एक शिक्षक की गोद में ही पलते हैं".... प्रभाकर कुमार 'माचवे' की कलम से....