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नवंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अविवाहित मित्रों के नाम खुले ख़त...

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       मेरे प्यारे अविवाहित मित्रों,                         स्नेहपूर्ण अभिनंदन ! सोचा एक ख़त लिखूं  आपको...यह पत्र उन सभी अविवाहित मित्रों को समर्पित जिनको अपने लिए किसी जीवन संगिनी की तलाश है... जीवन संगिनी...हमसफ़र... जिसके साथ ज़िन्दगी के सुख- दुःख बाँटें जाए, जिस अजनबी के साथ जीवन को और बेहतर तरीके से जीने के सुनहरे सपने आप बुन रहे हैं...उनका चयन बहुत ही सावधानीपूर्वक करना निहायत ही जरूरी है...जी,मैं चयन की बात कर रहा हूँ क्योंकि विवाह निश्चित तौर पर आपका चुनाव है... तो सवाल उठता है,कि आख़िर कैसी हो आपकी जीवनसंगिनी ? क्या हो उसके मौलिक गुण ?  देखिये, भाईयों... विवाह करने का यदि आपने फैसला कर ही लिया है तो मेरा विनम्र आग्रह होगा कि आपको सबसे पहले खुद से ही यह सवाल करना चाहिए कि "आख़िर आपको क्यों करना है विवाह ? " थोड़ा अज़ीब लग रहा होगा आपको...क्यों करना है ? ये भी कोई सवाल है...सब करते हैं...कोई सोचता थोड़ी, कि क्यों करना है ! जी, यही तो विडम्बना है कि लोग एक छोटी सी खर्च के पहले सौ मर्तबा...

गांधी जी का चौथा बन्दर !

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गांधी जी का चौथा बंदर ! नमस्ते दोस्तो ! आज मैं अपने आलेख के साथ आपके साथ जुड़ा हूँ...शीषर्क और तस्वीर देखकर शायद कुछ न कुछ आपने अनुमान लगा ही लिया होगा...जी हाँ.. आप बिल्कुल सही सोच रहे, मैं 21वीं सदी के सबसे अनोखे बन्दर.. "गांधी जी का चौथा बन्दर" की बात कर रहा... बड़ा अनोखा है ये बन्दर...और सबसे खास बात, ये आपको आज कल हर चौक,चौराहे पर,  बस के इंतेज़ार में खड़े,ट्रैन के इंतेज़ार में बैठे...कभी-कभी तो खाते वक़्त, टीवी देखते वक़्त...क्लास रूम में पीछे की सीट पर बैठे बच्चों के हाथों में...कईयों को तो अब शौच करते वक़्त भी ऐसी स्थिति में पाया गया है... जी, हां...  इस छोटी सी मायावी मशीन ने हमें सच में  गांधी जी का चौथा बन्दर बना दिया है...इस छः इंच के मायावी यंत्र ने मनुष्य को दुनिया से कितना जोड़ा है पता नहीं...मगर, इसकी वजह से मनुष्य खुद से तो कोसो दूर हो गया है...अपनों से कोसो दूर हो गया है... अब वो बचपन की खिलखिलाती हँसी... छोटी उम्र में किताबों से दिल्लगी...परिवार के साथ की वो गप्पें...दादी नानी की कहानियां...सब कुछ को बड़े ही आहिस्ते आहिस्ते...इस मायावी यंत्र ने छीन लि...

ये खिलाड़ी गेंद नहीं, गेंदबाज़ के दिमाग से खेलता !

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अनन्त आकाश की अनन्त गहराईयों में सूर्य सा चमकने वाले SKY को नमन ! यह न तो सचिन की तरह शानदार स्ट्रैट ड्राइव लगाता और न ही कोहली की तरह बेहतरीन कवर ड्राइव...न ही युवराज की पैरों पर बैठकर गगनचुम्बी छक्के...और न ही सहवाग की तरह कवर और पॉइंट के ऊपर से चौके...न लक्ष्मण की तरह कलामती कलाई है...और न ही गांगुली की तरह कदम बढ़ाकर चौके मारने का जिगरा.... इसमें ऐसा कुछ नहीं है, जो क्रिकेट बुक के क्रिकेटिंग शॉट के रूप में दर्ज है...लेकिन, फिर भी यह बल्लेबाज़ स्पेशल है...इसने अपने शॉट ईजाद किये हैं... "लीक-लीक गाड़ी चले, लीके चले कपूत... एकै लीके न चले...सुरमा...सिंह ...और सपूत" इस खिलाड़ी ने यह साबित कर दिया है कि बने बनाये रास्ते पर तो हर कोई चलता है,किन्तु जो सुरमा होते हैं वो अपने रास्ते खुद बनाते...यदि काबिलियत पर भरोसा हो तो दुनिया एक न एक दिन आपके कारनामे को चमत्कार मानती है, और चमत्कार को नमस्कार करती है... सूर्य कुमार यादव भारतीय क्रिकेट का वो उभरता हुआ सितारा है,जिसके बल्लेबाज़ी ने ये बतलाया है कि क्रिकेट सिर्फ़ शारीरिक खेल नहीं है...अच्छा बल्लेबाज़ बॉल को खेलता है,उसके मेर...