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अप्रैल, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आतातायियों के कृत्यों पर तमाचा है यह प्रकाश पर्व

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जिस लालकिले से जुल्म का साम्राज्य फैलाने वाले औरंगजेब की सलामती के लिए अज़ान गुंजा करते थे,जिस किले पर एक समय मुगलिया सल्तनत का झंडा फहरता रहता था,जिसे देखकर देश की आम जनता के आंखों से खून के आंसू निकलते थे... जिस औरंगजेब की कुरुरता का कभी गवाह बनी,लालकिला की ये दीवारें जालिमों के बेतहाशा अट्हास के गूंज में  आम लोगों की चीखों को दफ़न कर देती थी...           जिस किले से शासन करते हुए,औरंगजेब ने सिखों के नौवें गुरु तेगबहादुर को इस्लाम न कबूलने पर उनके शीश काटने का मुगलिया फरमान सुनाया था... आज वही लालकिला..जी,हाँ.. वही लालकिला... गुरु तेगबहादुर की 400वीं जयंती प्रकाश पर्व पर इस तरह सज-धज के उन आतातायियों का उपहास उड़ाएगा,ये मैंने कल्पना भी नहीं की थी... मैं अपने आप को धन्य मानता हूँ,जो मेरा जन्म इस बलिदानी धरा पर हुआ...जहां हँसते-हँसते अपने चार बेटो को बलिदान करने वाला बाप,खुद की जान दे दी...मगर अपने धर्म को नहीं छोड़े... प्रभाकर कुमार 'माचवे' की कलम से...

प्राइवेट स्कूल :- लूट घर

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लूट के लिए अब बाजार सज चुका है...लुटेरों ने अपने बाज़ार लगा लिए हैं...और वो भी पूरे ताम- झाम के साथ... जी, हां दोस्तों...अब विद्यालय वह स्थान नहीं जहां विद्या अर्जन की चाह रखने वाले विद्यार्थी जाया करते थे...बाज़ारीकरण के इस दौर में बड़े ही सलीके से इसे लूट का अड्डा बनाया गया है.. प्राइवेट स्कूलों के लिए यह महीना किसी लग्न से कम नहीं, पांच - पांच सौ की कई गड्डियां रोज रबड़ के जोड़ से खुद को बंधा हुआ महसूस कर रही है..  पिछले दो वर्षों से ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से प्राइवेट स्कूलों को ठीक से अपने प्रायोजित कारोबार को चलाने का मौका नहीं मिल पा रहा था...इन दो वर्षों में न तो उनकी किताबें-कॉपियां (जिन पर उन्हें 50% तक का कमीशन मिलता),बिक सकी... और न ही रंग-बिरंगे बेमतलब के ड्रेस,जूते और न जाने क्या क्या... इस बार उन दो वर्षों की पूरी वसूली का इंतज़ाम है...अभिभावक अपने जेब ढीली करने को तैयार रहें... आज प्राइवेट स्कूल विद्यालय कम एक मॉल ज्यादा लगता है,जहां बिकती हैं कॉपियां,किताबें,कपड़े,जूते और भी कई चीजें...और एकरूपता के नाम आपको वहीं से खरीदने को होना पड़ता है मजबूर...वरना साफ कहा जाता ...

RRR

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शानदार पटकथा,बेहतरीन निर्देशन और उम्दा कलाकारी...का संयोग है RRR          RISE...ROAR...REVOLT... जूनियर NTR और राम चरन की जबरदस्त जुगलबन्दी...अजय देवगन और आलिया भट्ट का छोटा लेकिन दमदार रोल... इस फ़िल्म ने न सिर्फ़ राष्ट्रवाद की भावना  केंद्र में है,बल्कि राम के सशक्त स्वरूप को भी बड़ी ही विलक्षणता के साथ प्रस्तुत किया गया है...सिनेमेटोग्राफी की दुनिया में बाहुबली की टक्कर की यह फ़िल्म दर्शकों को रोमांचित कर देती है... इस फ़िल्म की सफलता ने इस बात को साबित किया है,कि बिना किसी फूहड़ता और नँगा नांच के भी फ़िल्म को सुपर डुपर हिट बनाया जा सकता है...बिना किसी की भावना को आहत किये भी दर्शकों को रोमांचित करते हुए अपनी बात को जिस सरलता व सहजता से इस फ़िल्म ने प्रस्तुत किया है वो निश्चित तौर पर काबिल ए तारीफ़ है... फ़िल्म में दिखलाये गए कई दृश्य जैसे बाघ से लड़ाई,पानी में लगे आग से बच्चे को बचाने का सफल प्रयास,महल पर बाघ और जंगली जानवरों के साथ आक्रमण और अंत में रामावतार के साथ जंगल की आख़िरी लड़ाई ...सच मानिए एकदम रोमांच से भर देती है... वहीं अपने भाई को कोड़े से म...