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"जिसे जितना प्यार व सम्मान दो, वही काटेगी...चाहे मच्छर हो या इंसान"...

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मुझे डेंगू हो गया...अभी-अभी कुछ दिनों पहले मैंने मच्छर दिवस पर मच्छरों को मानवता और अस्तित्व का सबसे बड़ा रक्षक बतलाकर उनकी खूब सारी प्रशंसा की थी...मगर, लगता है मेरी इस नेकी का उन्होंने अपने तरीके से मुझे रिटर्न् गिफ्ट दिया है डेंगू के रूप में... एक बात तो अब मुझे समझ आ गई है कि  ''जिसे जितना प्यार व सम्मान दो, वही काटेगी...चाहे मच्छर हो या इंसान"... अब इस कलियुग का सीधा सा नियम है, तवज्जों और अहमयित उसी को दो, जो उसके काबिल...इंसान को जरूरत से ज्यादा तवज्जों और कुत्ते को घी हज़म नहीं होती ! सतयुगी आदर्श का कलियुग में कोई मोल नहीं ! पहले सीधा सा सिद्धांत था कि यदि आप किन्ही का भला कर रहे तो आपको लाभ मिलेगा, आपको यश मिलेगा, सामने वाला आपका सम्मान करेगा...किन्तु, इस कलियुग में तो भलाई का जमाना ही न रहा...यदि आप किसी का भला कर रहे तो तैयार रहिये हानि, अपयश और अपमान का कड़वा घूंट को पीने के लिए... वो सतयुग था, जब बच्चों के लिए माँ-पिता के चरण में ही जन्नत हुआ करते थे...ये कलयुग है...यहां बियर बार और क्लब पार्टी में ही जन्नत के दर्शन होते हैं... वो दौर कुछ अलग था, जब ...

आज आप जी रहे, इसकी वजह मच्छर हैं !

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ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत पल, रात की नींद में खलल डालने वाले एक छोटे,निहायत ही मासूम से जीव 'मच्छर' का आज दिवस है...आपको लग रहा होगा,इसे आप इतना निहायत ही मासूम क्यों कह रहे हैं... यह मासूम नहीं, शैतान है...जो जीना दूभर कर दिया है... मच्छरों की भी अपनी दर्द भरी राम कहानी है, मगर इंसान अपने हथियारों के ज़खीरे को भरने में इतना मशगूल हो गया है कि उसे उसकी दर्द भरी कहानी सुनने की न तो फुर्सत है और न ही चाहत...मगर, मुझे आप थोड़े संवेदनशील लग रहे तो मैं सोच रहा कि उसकी ज़िन्दगी की कहानी आपको सुनाऊं... एक छोटे से जीवन काल में मच्छर को जीवन चक्र के चार स्तरों से गुजरना पड़ता है...मच्छर के जीवन चक्र में अण्डा, डिम्भक, प्यूपा और वयस्क चरण होते हैं...आपको शायद पता होगा मनुष्यों को काटने का काम मादा मच्छर ही करती है,नर तो बेचारे पुष्प पराग से ही अपना जीवन यापन कर लेते...जीवन में काटने का नेक काम मादा ही करती है, चाहे वो मच्छर प्रजाति की हो या इंसान की... मगर, रोचक बात ये है कि ये मादा मच्छर किसी शौक से इंसानों को काटने नहीं आती,इनके भीतर की ममता इन्हें मौत से भिड़कर अस्तित्व की लड़ाई...