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चल करते एक नया अनुसंधान...

चल करते एक नया अनुसंधान... तू मेरी गीता पढ़ ले,मैं पढ़ता हूँ तेरा कुरान... पहले बन तो जाए इंसान.. बाद में बनेंगे,हिन्दू या मुसलमान... कब से इतने मतलबी हो गए हैं हम... बेच दिया अपना ईमान... चल करते एक नया अनुसंधान... तू मेरी गीता पढ़ ले,मैं पढ़ता हूँ तेरा कुरान.... तू मेरी दीवाली की मिठाईयां खा ले, और मैं शौक से खाऊं तेरी ईद की सेवईयां... चल अब इंसान बनके,मिटा दें मजहब की ये दूरियां... अब तू ठान ले,नहीं है कोई मजबूरियां... अपनेपन से भी क्या कोई बड़ी है खुशियां... चल करते एक नया अनुसंधान... तू मेरी गीता पढ़ ले,मैं पढ़ता हूँ तेरा कुरान... तू मेरे मंदिर पर मत्था टेक, और मैं करूं तेरे मस्जिद में इबादत... चल अब हम करते हैं,एक दूजे से बेपनाह मोहब्बत... खुद-ब-खुद नेस्तनाबूत हो जाएगी,हमको अलग करने वाली ताकत... चल करते हैं,एक दूजे की सलामती के लिए इबादत... मुझे पूरा यकीन है... जरूर होगी खुदा की रहमत... हमारे मुल्क की होगी बरकत... पूरी होगी हमारी हर हसरत... चल करते एक नया अनुसंधान.... तू मेरी गीता पढ़ लें,मैं पढ़ता हूँ तेरा कुरान... अपना और तेरा दोनों के लहू का रंग लाल है... यह...

सार्वजनिक परिवहन: समय की मांग

जीवन में लोग इतने सिमटते जा रहे हैं,धन से सामर्थ्य लोग लालसाओं में इतने घिर चुके हैं कि उन्हें अब सार्वजनिक जीवन के उल्लास में अजीब सी बेचैनी का आभास होने लगा है,पहले लोग शौक से सार्वजनिक परिवहन से यात्रा कर जीवन की समग्रता का लाभ लेना ,व्यवहारिक ज्ञान से खुद को लबरेज करना चाहते थे,मगर आज परिस्थिति बिल्कुल विपरीत हो चुकी है,अपने निजी वाहन से यात्रा करना सुविधा से ज्यादा झूठी शान की पेशगी का विषय बनता जा रहा..व्यक्ति खुद को लोगो की नज़र में स्थापित करने की चाह में इतना मशगूल हो गया है कि उसे सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने से होने वाले लाभ की जानकारी होने के बावजूद भी अपनी प्रतिष्ठा और शान की स्थापना करने की स्वार्थता को छिपाते हुए अपनी जरूरत का रोना रो रहा है,जो काफी हास्यस्पद है।अगर हम सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें तो ये हमे संसाधन की बचत के साथ -साथ व्यवहारिक ज्ञान से भी हमें रूबरू कराएगा,सड़क जाम की समस्या का मूल कारण निजी वाहन की अधिकता भी है,पर्यावरण प्रदूषण जैसी भयानक समस्या से भी हमें कुछ हद तक निजात मिल सकता है...अतः एक छोटी पहल की जाए,यथासम्भव सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल...