चल करते एक नया अनुसंधान...
चल करते एक नया अनुसंधान... तू मेरी गीता पढ़ ले,मैं पढ़ता हूँ तेरा कुरान... पहले बन तो जाए इंसान.. बाद में बनेंगे,हिन्दू या मुसलमान... कब से इतने मतलबी हो गए हैं हम... बेच दिया अपना ईमान... चल करते एक नया अनुसंधान... तू मेरी गीता पढ़ ले,मैं पढ़ता हूँ तेरा कुरान.... तू मेरी दीवाली की मिठाईयां खा ले, और मैं शौक से खाऊं तेरी ईद की सेवईयां... चल अब इंसान बनके,मिटा दें मजहब की ये दूरियां... अब तू ठान ले,नहीं है कोई मजबूरियां... अपनेपन से भी क्या कोई बड़ी है खुशियां... चल करते एक नया अनुसंधान... तू मेरी गीता पढ़ ले,मैं पढ़ता हूँ तेरा कुरान... तू मेरे मंदिर पर मत्था टेक, और मैं करूं तेरे मस्जिद में इबादत... चल अब हम करते हैं,एक दूजे से बेपनाह मोहब्बत... खुद-ब-खुद नेस्तनाबूत हो जाएगी,हमको अलग करने वाली ताकत... चल करते हैं,एक दूजे की सलामती के लिए इबादत... मुझे पूरा यकीन है... जरूर होगी खुदा की रहमत... हमारे मुल्क की होगी बरकत... पूरी होगी हमारी हर हसरत... चल करते एक नया अनुसंधान.... तू मेरी गीता पढ़ लें,मैं पढ़ता हूँ तेरा कुरान... अपना और तेरा दोनों के लहू का रंग लाल है... यह...