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राष्ट्रकवि को नमन !

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खड़ी हिंदी को साहित्य में प्रमाणिकता से दर्ज़ करवाने वाले राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन ! गुप्तजी ही वो साहित्यकार हैं जिन्होंने समाज मे उपेक्षित महिलाओं को उनके कर्म की पराकाष्ठा के लिए यथोचित स्थान दिलवाया...चाहे वो लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला हो या फिर महात्मा बुद्ध की पत्नी यशोधरा...                     इनके त्याग को भारतीय समाज की जनचेतना में आदर्श रूप में प्रस्तुत करने का सबसे प्रभावशाली कार्य गुप्त जी ने ही किया...इनकी स्पष्ट खड़ी बोली ने जिस तरह भारतीय संस्कृति के ध्वज को पूरे विश्व क्षितिज पर लहराने में सफलता पाई है,यकीनन..पूरा देश उनका ऋणी है !                                       जिस वक्त तथाकथित भारतीय बुद्धिजीवी वर्ग पाश्चात्य संस्कृति को विकास का मापदंड मानने की भूल करने पर उतारू था,उस वक़्त इनकी खड़ी तीखी बोली ने भारतीय सनातन संस्कृति के आदर्शों को अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया... "यह ठीक...